Thursday, January 24, 2013

अब पंचायतों के जरिए मिल रही है

17-जनवरी-2013 14:09 IST
महिलाओं की आवाज को  पहचान 
पंचायती राज पर विशेष लेख//डॉ. हृषिकेश पांडा*                                 
विकेन्द्रीकृत सरकार की जड़े ग्राम सभा में गहराई से समाई हुई है। इसके तहत ग्राम पंचायत का हर एक मतदाता इसका सदस्य होता है और निर्णय लेने की प्रक्रिया, योजनाओं की सहमति, योजना को रद्द करने और लाभार्थियों के चयन में अपनी हिस्सेदारी कर सकता है। 

     ग्राम सभा को लगातार सामाजिक अंकेक्षण के लिए एक सुदृढ़ संस्थान के रुप में प्रस्तुत किया जा रहा है। इसका कारण यह है कि ग्राम सभा में ऐसे लोग शामिल होते हैं जो योजनाओं और कार्यक्रमों के लाभार्थी होते हैं और जब कोई कार्य शुरु होता है तो वो कार्यस्थल पर उपस्थित होते हैं और इस हिसाब से वे योजनाओं और कार्य के क्रियान्वयन की गुणवत्ता का सबसे अच्छी तरह से आकलन सकते हैं। इसलिए सामाजिक अंकेक्षण के लिए ग्राम सभा सर्वोत्तम एजेंसी है।

ग्राम सभा के साथ समस्या यह है कि कई स्थानों पर उपस्थिति काफी कम होती है। अधिकांशतः पंचायतों द्वारा शुरु किए गए कामों का एजेंडा सीमित होता है इसलिए बैठक में भाग लेने की कोई रुचि कई लोगों में नहीं होती है। कई बार एक दिन की मजदूरी से हाथ धोने का डर होता है। ग्राम सभा में लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए इसके पास समय होना चाहिए और साथ ही मुद्दों को व्यापक रुप में लिया जाना चाहिए। ये मुद्दे अधिकांश लोगों के हित से संबंधित होने चाहिए। जैसे कि- प्राथमिक विद्यालय, मध्याह्न भोजन, पेयजल प्रणाली, सीवर प्रणाली, प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल, आंगनवाडी और टीकाकरण सहित बाल एवं मातृत्व देखभाल कार्यक्रम। इनमें से अधिकतर समस्याओं का सामना महिलाएं करती हैं न कि पुरुष। इसलिए इन विषयों पर चर्चा तभी की जा सकती है जब महिलाओं की पर्याप्त भागीदारी हो।

अन्य समस्याएं जो महिलाओं को प्रभावित करती हैं वे हैं- घर के प्रबंधन के लिए नकद आय और खाद्य सुरक्षा, जन वितरण प्रणाली खाद्य सुरक्षा का एक भाग है। खाद्य सामग्री का एक अन्य भाग है नकद सुरक्षा, कृषि, बागवानी, डेयरी, मत्स्य पालन, हथकरघा आदि जैसी आर्थिक गतिविधियां। इसी से संबंधित अन्य गतिविधियों में सिंचाई, भूमि प्रबंधन, और मृदा संरक्षण शामिल है। ग्राम सभा द्वारा ऐसे कार्यक्रमों की प्रभावी निगरानी तभी संभव है जब ग्राम सभा की बैठकों में महिलाओं की भागीदारी पर्याप्त मात्रा में हो क्योंकि वे इन गतिविधियों की साक्षी होती हैं और पुरुषों की तुलना में खाद्य सुरक्षा का प्रबंधन उन्हें अधिकतर करना होता है। देश के अनेक भागों में महिलाओं की भागीदारी को हमेशा सुनिश्चित करना संभव नहीं होता क्योंकि वहां महिलाएं पुरुष के सामने कुछ नहीं बोलतीं। कई बार पुरुष चाहते हैं कि महिलाएं केवल घर का ही काम करें और बैठकों का हिस्सा न बनें क्योंकि उनके हिसाब से यह समय की बर्बादी है। इस दुश्चक्र के परिणामस्वरुप ग्राम सभा की बैठकों में महिलाओं की भागीदारी नगण्य हो जाती हैं, ग्राम सभा ऐसे मुद्दों को नहीं उठाती जो अधिकांश लोगों को प्रभावित करते हैं और महिलाओं की भागीदारी और भी कम होती चली जाती है। इस समस्या के निवारण के लिए पंचायती राज मंत्रालय राज्यों के साथ विशेष ग्राम सभा की बैठकों की बात उठा रही है जिसमें विषयों की व्यापकता हो।

अगस्त 2011 और फिर अगस्त 2012 में पोषण पर चर्चा के लिए विशेष ग्राम सभा बैठकों का आयोजन किया गया था। इन बैठकों में महिला और बाल देखभाल, स्वास्थ्य, स्वच्छता, पेयजल, जन वितरण प्रणाली, शिक्षा, मध्याह्न भोजन, कृषि, बागवानी, डेयरी, मत्स्यपालन आदि से संबंधित कार्यक्रम प्रमुखों ने हिस्सेदारी की। इन बैठकों में महिलाओं की अधिक भागीदारी रही और अधिकांश लोगों को, खासतौर पर महिलाओं को लाभ हुआ।

अक्तूबर 2012 के दौरान महिलाओं से संबंधित विशेष ग्राम सभा बैठक का आयोजन किया गया। इसमें आंगनवाडी केन्द्रों, स्वास्थ्य, स्वच्छता, पेयजल, महिलाओं और बच्चों के प्रति हिंसा पर रोक, दहेज और महिला भ्रूण हत्या पर रोकथाम जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई। महिलाओं की उपस्थिति और भागीदारी को बढ़ाने के लिए राज्यों को ग्राम सभा में महिलाओं के लिए विशेष गणपूर्ति की व्यवस्था की सलाह दी गई है।

हालांकि इन प्रयासों के बावजूद यह आवश्यक है कि विभिन्न कारणों से महिला ग्राम सभा की बैठकें होना आवश्यक है। पहला, एक महिला ग्राम सभा की बैठक में महिलाओँ की उपस्थिति और भागीदारी ग्राम सभा की बैठक की तुलना में अधिक होती है। दूसरा, महिला ग्राम सभा की बैठकों में दहेज, घरेलू हिंसा, उत्पीड़न, सार्वजनिक स्थानों पर हिंसा, महिला भ्रूण हत्या और महिला तथा बच्चों के व्यापार जैसे संवेदनशील मुद्दों को उठाया जाता है। महाराष्ट्र जैसे कुछ राज्य महिला ग्राम सभा की बैठकों को ग्राम सभा की बैठकें करते आए हैं। हाल ही में राजस्थान, ओडिशा और कर्नाटक जैसे राज्यों ने महिला ग्राम सभाओं की बैठकों के आयोजन के लिए अधिसूचना जारी की है। हमारा अनुभव दर्शाता है कि ग्राम सभा की बैठकें अथवा महिला सभा की बैठकों में महिलों की अधिक भागीदारी से सिंचाई और जलाशयों के निर्माण जैसी एमजीनरेगा जैसी गतिविधियों में तेजी आती है और कृषि, बागवानी तथा चारा तथा पेयजल आपूर्ति में सुधार जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलता है।

पंचायती राज मंत्रालय ने राज्यों को विशेष ग्राम सभा और महिला सभा की बैठकों पर चर्चा की सलाह दी है ताकि कन्या भ्रूण हत्या जैसे महिलाओं से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की जा सके। विषम बाल लिंग अनुपात और कन्या भ्रूण हत्या जैसे मुद्दों पर चर्चा का भी परामर्श दिया गया। जिन क्षेत्रों में महिला सभाओं का गठन नहीं हुआ है उन्हें इसका गठन करना चाहिए और बाल लिंग अनुपात के मुद्दे को उठाना चाहिए। आंगनवाडी की निगरानी समिति को पंचायत/वार्ड सदस्य के अधीन करने और ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता और पोषण समिति को ग्राम पंचायत की उप-समति बनाने से पंचायतों के पास गर्भवती महिलाओं, बालक-बालिकाओं के जन्म और शिशु मृत्यु दर के पंजीकरण की सूचना होगी। इससे पंचायत जन्म के समय लिंगानुपात पर नजर रख सकेगी। मैंने ग्राम सभाओं, महिला सभाओं और पंचायत के चयनित प्रतिनिधियों की कार्यशालाओं की कई बैठकों में हिस्सा लिया है और देखा है कि महिलाएं किस प्रकार कन्या भ्रूण हत्या का मुद्दा उठाती है, इस मानसिकता के पीछे के असली कारणों की पहचान करती हैं (महिलाओं के प्रति अपराध एक प्रमुख मुद्दा है) और वे किस प्रकार इसका सामना करती हैं।

तदनुसार विभिन्‍न राज्‍यों में लैंगिक मुद्दों पर विशेष ग्राम सभाएं आयोजित हुईं। हरियाणा में 1 सितंबर, 2012 को जुलाना ब्‍लॉक में आयोजित एक कार्यक्रम में 1500 महिलाओं ने भाग लिया। सात ग्राम पंचायतों से लोगों ने इस कार्यक्रम का प्रतिनिधित्‍व किया। उन्‍होंने इस अवसर पर शपथ ली कि वे कन्‍या भ्रूण हत्‍या जैसे सामाजिक कृत्‍य को खत्‍म करने में अपने पूरा सहयोग देंगे। इन सात गांवों की महिलाओं ने सार्वजनिक व्‍यवस्‍था में महिलाओं की संख्‍या कम होने और बुजुर्गों के कल्‍याण के संबंध में मुख्‍य रूप से चर्चा की।

30 अक्‍टूबर, 2012 को दक्षिण अंडमान के नमुनाघर में लैंगिक मुद्दों पर विशेष ग्राम सभा आयोजित की गई। इसमें 30 महिलाओं और युवतियों ने भाग लिया। अन्‍य मुद्दों के साथ महिलाओं और बच्‍चों के प्रति हिंसा की रोकथाम, दहेज प्रथा और कन्‍या भ्रूण हत्‍या की रोकथाम पर भी चर्चा हुई। इस बैठक में लोगों ने महिलाओं से संबंधित मुद्दों पर प्रभावी तरीके  से चर्चा के लिए महिला सभा आयोजित करने का फैसला भी किया।

5 मार्च, 2012 को केरल के अल्‍लपुझा जिले में मरारिकुला दक्षिण ग्राम पंचायत में महिलाओं पर हिंसा के बारे में पता लगाना के संबंध में एक बैठक हुई। लगभग 2000 लोगों, जिसमें अधिकतर महिलाएं थी ने भाग लिया। बैठक के दौरान महिलाओं पर अपराध के संबंध में मरारिकुला दक्षिण ग्राम पंचायत की सिफारिशों पर चर्चा हुई। इस ग्राम पंचायत विशेषकर सार्वजनिक जगहों और शैक्षिक संस्‍थानों में महिलाओं पर हुए अपराध का पता लगाया। ग्राम सभा ने इस संबंध में कुछ हल भी निकाले पुरूषों को लाभप्रद गतिविधियों में व्‍यस्‍त रखना, महिलाओं के लिए ऐसी गतिविधियां सुनिश्चित करना जिससे वे पैसा कमा सकें, हेल्‍पलाइन शुरू करना, स्‍कूलों में परामर्श की व्‍यवस्‍था शुरू करना ताकि बच्‍चों में विश्‍वास पैदा हो सके और वे हिंसा के खिलाफ आवाज़ उठा सकें। केरल सरकार ने इस अवधारणा को अपनाया है और निर्भय कार्यक्रम के तहत राज्‍य में इसे शुरू करने की प्रक्रिया में है।

पंचायत में महिलाओं के लिए आरक्षण से 1993 के बाद पंचायतों में महिलाओं का प्रतिनिधित्‍व बढ़ा है।  इससे स्‍थानीय स्‍तर पर महिलाओं का राजनैतिक नेतृत्‍व बढ़ा है।  ग्राम सभा के महिलाओं से संबंधित मुद्दों को उठाने के प्रयासों और महिला सभाओं के बनने से महिलाएं अधिक सशक्‍त हो रही हैं। देश के कुछ भागों में महिला ग्राम सभा की बैठकों में महिलाओं का जोश जो पहले न  के बराबर था, अब देखते बनता है।   (पसूका फीचर)
*डॉ. हृषिकेश पांडा: अपर सचिव, पंचायती राज मंत्रालय

मीणा/विजयलक्ष्मी/प्रियंका-16

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