Saturday, December 15, 2012

ग्रामीण महिलाओं का सशक्तिकरण

40 %महिलाएं शारीरिक अथवा यौन हिंसा से पीडि़त-कृष्‍णा तीरथ 
महिला और बाल विकास राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्‍णा तीरथ ने आज लोक सभा में एक प्रश्‍न के लिखित उत्‍तर में बताया कि राष्‍ट्रीय परिवार स्‍वास्‍थ्‍य सर्वेक्षण-।।। (2005-06) के आंकड़ों के अनुसार 15-49 आयु वर्ग में 35.4 प्रतिशत महिलाएं तथा विवाहित महिलाओं के मामले में लगभग 40 प्रतिशत महिलाएं शारीरिक अथवा यौन हिंसा से पीडि़त हैं। इसके अतिरिक्‍त, आंकड़े दर्शाते हैं कि महिलाओं के विरूद्ध घरेलू हिंसा के शारीरिक तथा यौन दोनों रूप, शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक हैं। 

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय देश में महिलाओं के आर्थिक सशक्‍तीकरण के लिए निम्‍नलिखित स्‍कीमों का संचालन कर रहा है- 

1 राष्‍ट्रीय महिला सशक्‍तीकरण मिशन (एनएमईडब्‍ल्‍यू) : महिलाओं को व्‍यापक रूप से सशक्‍त करने के लिए भारत सरकार का एक प्रयास है। यह एक केन्‍द्रीय प्रायोजित स्‍कीम है, जो अप्रैल, 2011 में स्‍वीकृत की गई थी जिसमें अंतर क्षेत्रीय अभिबिंदुता को सुदृढ करना अनिवार्य है। 

2 महिलाओं हेतु प्रशिक्षण एवं रोजगार कार्यक्रम के लिए सहायता (स्‍टेप) वर्ष 1986-87 के दौरान केन्‍द्रीय क्षेत्र स्‍कीम के रूप में आरंभ की गई थी। इसका उद्देश्‍य स्‍व-रोजगार तथा मजदूरी रोजगार के लिए कौशलों को उन्‍नयन करते हुए महिलाओं पर महत्‍वपूर्ण प्रभाव डालना है। लक्षित वर्ग में ग्रामीण वंचित सम्‍पत्ति विहीन महिलाएं तथा शहरी गरीब महिलाओं को शामिल किया गया है। 

3 100 करोड़ रूपये की कोरपस में राष्‍ट्रीय महिला कोष (आरएमके) गरीब महिलाओं का सामाजिक आर्थिक उत्‍थान करने के लिए सूक्ष्‍म वित्‍त सेवाएं प्रदान करता है। 
4 प्रियदर्शनी, एक स्‍व-सहायता ग्रुप (एसएचजी) है जो महिलाओं तथा किशोरियों के व्‍यापक सशक्‍तीकरण के लिए परियोजना आधारित है। यह स्‍कीम उत्‍तर प्रदेश तथा बिहार के मध्‍य गंगा के मैदानी क्षेत्रों के 7 जिलों में क्रियान्वित की जा रही है। (PIB) 14-दिसंबर-2012 15:31 IST
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मीणा/बिष्‍ट/चन्‍द्रकला-6106

बाल विकास योजनाएं

33 सामुदायिक विकास ब्‍लाकों तथा 4891 सामुदायिक केन्‍द्रों में विस्‍तार
महिला और बाल विकास राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्‍णा तीरथ ने आज लोक सभा में एक प्रश्‍न के लिखित उत्‍तर में बताया कि समेकित बाल विकास सेवा स्‍कीम (आईसीडीएस) 6 वर्ष से कम उम्र के बच्‍चों तथा गर्भवती और धात्री माताओं के स्‍वास्‍थ्‍य पोषण और विकास की आवश्‍यकताओं को पूरा करने के लिए सरकार का एक प्रमुख कार्यक्रम है। स्‍कीम के अन्‍य उद्देश्‍य बाल विकास को प्रोन्‍नत करने के लिए उनकी मृत्‍यु दर, रूग्‍णता, कुपोषण और स्‍कूल छोड़ दिए जाने की घटनाओं में कमी तथा विभिन्‍न्‍ विभागों के बीच नीतियों का प्रभावी समन्‍वयन और क्रियान्‍वयन है। 

बच्‍चों की मृत्‍यु दर में कमी लाने के लिए आईसीडीएस के अतिरिक्‍त सरकार द्वारा स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय के राष्‍ट्रीय ग्रामीण स्‍वास्‍थ्‍य मिशन के प्रजनन एवं बाल स्‍वास्‍थ्‍य कार्यक्रम के तहत विभिन्‍न उपाय क्रियान्वित किए जा रहे हैं। इसमें समेकित नवजात तथा बाल्‍यावस्‍था रूग्‍णता प्रबंधन विशेष नवजात देखरेख यूनिट और पोषण पुनर्वास केन्‍द्रों सहित जननी शिशु सुरक्षा योजना, नवजात शिशु सुरक्षा कार्यक्रम शामिल है। 

अपने परिचालन के 35 वर्षों में, आईसीडीएस जिसका 1975 में चयनित 33 सामुदायिक विकास ब्‍लाकों तथा 4891 सामुदायिक केन्‍द्रों में विस्‍तार किया गया था, 2008-09 में अनुमोदित किए गए सर्वसुलभीकरण के अंतिम चरण के साथ पूरे देश में 7076 अनुमोदित परिययोजनाओं तथा 14 लाख आंगनवाड़ी केन्‍द्रों के माध्‍यम से सर्वसुलभीकरण हो गया है। तथापि, इसका अधिकांश विस्‍तार (50 प्रतिशत से भी अधिक) 2005 के बाद ही हुआ है। अपनी निर्दिष्‍ट सीमाओं में, कुपोषण की व्‍यप्‍तता जो 1998-99 (एनएफएचएस-2) में 42.7 प्रतिशत थी वर्ष 2005-06 (एनएफएचएस-3) में घटकर 40.4 प्रतिशत हो गई। राष्‍ट्रीय परिवार स्‍वास्‍थ्‍य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-3) सहित अनेक अध्‍ययनों से यह स्‍पष्‍ट होता है कि इस कार्यक्रम ने बाल-कुपोषण में कमी, देखरेख की पद्धतियों में आईएमआर और 5 वर्ष से कम उम्र के बच्‍चों की मृत्‍यु दर में कमी, सुधार तथा गुणवत्‍ता पूर्ण स्‍कूल-पूर्व शिक्षा सहित उन्‍नत प्रारंभिक बाल्‍यावस्‍था विकास परिणामों जैसे कुछेक प्रमुख कार्यक्रम के उद्देश्‍यों को प्राप्‍त करने की दिशा में सकारात्‍मक योगदान दिया है। 
(PIB)   14-दिसंबर-2012 15:39 IST

मीणा/बिष्‍ट/चन्‍द्रकला-6107

सबला योजना

पूरे देश में राजीव गांधी किशोरी सशक्‍तीकरण स्‍कीम-सबला 
महिला और बाल विकास राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्रीम‍ती कृष्‍णा तीरथ ने आज लोक सभा में सबला योजना के बारे में पूछे गए एक प्रश्‍न के लिखित उत्‍तर में बताया कि आंध्र प्रदेश और महाराष्‍ट्र सहित पूरे देश में राजीव गांधी किशोरी सशक्‍तीकरण स्‍कीम-सबला के कार्य निष्‍पादन का मानीटरन राज्‍यों/संघ राज्‍य क्षेत्रों द्वारा प्रस्‍तुत आवधिक वास्‍तविक और वित्‍तीय प्रगति रिपोर्टों (तिमाही और वार्षिक) के माध्‍यम से की भी जाती है। राष्‍ट्रीय, राज्‍य और सामुदायिक स्‍तर पर समेकित बाल विकास सेवा स्‍कीम के अंतर्गत स्‍थापित मानीटरन और पर्यवेक्षण तंत्र का उपयोग सबला स्‍कीम के मानीटरन के लिए भी किया जाता है। इस स्‍कीम के अंतर्गत सरकार द्वारा प्रगति की समीक्षा भी राज्‍य सरकारों/संघ राज्‍य प्रशासनों के साथ समीक्षा बैठकों तथा क्षेत्रीय दौरों में की जाती है। इसके अतिरिक्‍त स्‍कीम के अंतर्गत प्रगति की समीक्षा, मानीटरन करने, क्रियान्‍वयन में आने वाली बाधाओं की समीक्षा करने और उनका समाधान करने हेतु उपयुक्‍त तंत्र इजात करने के लिए राष्‍ट्र, राज्‍य, ब्‍लॉक और ग्राम स्‍तर पर सबला हेतु मानीटरन और पर्यवेक्षण समितियां गठित की गई हैं। वर्तमान में सबला का क्रियान्‍वयन प्रायोगिक आधार पर देश के 205 जिलों में किया जा रहा है। सरकार ने एडमिनिस्‍ट्रेटिव स्‍टॉफ कॉलेज ऑफ इण्डिया, हैदराबाद, आंध्र प्रदेश के द्वारा 11वीं योजना (2010-11 और 2011-12) के कार्य निष्‍पादन के बारे में सबला का स्‍वतंत्र रूप से मूल्‍यांकन करने के आदेश दिए हैं। स्‍कीम का आगे का विस्‍तार और प्रसार मूल्‍यांकन के निष्‍कर्षों पर निर्भर करेगा। 

उन्‍होंने यह भी जानकारी दी कि सरकार द्वारा स्‍कीम के कारगर क्रियान्‍वयन हेतु निम्‍नलिखित कदम उठाए गए हैं:- राज्‍यों/संघ राज्‍य क्षेत्रों को समय पर निधियां निर्मुक्‍त करना, स्‍कीम के अंतर्गत खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के माध्‍यम से गरीबी रेखा के नीचे रहने वालों की दर से खाद्यान्‍न का आबंटन, सबला के अंतर्गत गैर-पोषण घटक के क्रियान्‍वयन हेतु स्‍वास्‍थ्‍य, शिक्षा, युवा कार्य, श्रम और रोजगार तथा पंचायती राज संस्‍थाओं की विभिन्‍न स्‍कीमों/कार्यक्रमों के साथ सेवाओं का कारगर संकेन्‍द्रण सुनिश्चित करना, राज्‍यों/संघ राज्‍य क्षेत्रों द्वारा प्रस्‍तुत आवधिक वास्‍तविक और वित्‍तीय प्रगति रिपोर्टों के माध्‍यम से स्‍कीम के क्रियान्‍वयन का मानीटरन, राज्‍यों/संघ राज्‍य क्षेत्रों के साथ समीक्षा बैठकें आयोजित करना सबला के लिए गठित राष्‍ट्रीय मानीटरन और पर्यवेक्षण समिति की बैठकें करना एवं स्‍कीम के मानदंडों के अनुसार इसके क्रियान्‍वयन की समीक्षा करने हेतु क्षेत्रीय दौरे करना। (PIB
14-दिसंबर-2012 17:58 IST

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वि.कासोटिया/इंद्रपाल/रामकिशन-6112

Wednesday, December 12, 2012

महिलाओं की समस्या का समाधान करने के लिए हेल्पलाइन

40 प्रतिशत महिलाएं शारीरिक अथवा यौन हिंसाओं की शिकार
Photo Courtesy Indore Police
महिला और बाल विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा तीरथ ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-।।। (2005-06) के आंकड़ों के अनुसार 15-49 आयु वर्ग की 35.4 प्रतिशत कुल विवाहित महिलाओं में लगभग 40 प्रतिशत महिलाएं शारीरिक अथवा यौन हिंसाओं की शिकार हुई हैं। 6.7 प्रतिशत महिलाएं घरेलू हिंसा के दोनों रूपों शारीरिक एवं यौन हिंसा का शिकार हुई हैं। इसके अलावा, आंकड़ों से यह पता चलता है कि घरेलू हिंसा के दोनों रूपों शारीरिक एवं यौन हिंसा की घटनाएं शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक हैं।
12वीं पंचवर्षीय योजना हेतु महिला एजेंसी एवं सशक्तीकरण पर योजना आयोग द्वारा गठित कार्यदल तथा 12वीं पंचवर्षीय योजना हेतु महिला एजेंसी एवं बाल अधिकार पर संचालन समिति ने महिला हैल्पलाइऩ की स्थापना की अनुशंसा की है। तथापि, सरकार ने सरकार के अंदर निहित मूल्यांकन तंत्र द्वारा मूल्यांकन सहित इस नई स्कीम को शुरू करने का निर्णय नहीं लिया है।
(PIB)  12-दिसंबर-2012 15:11 IST
मीणा/बिष्ट/शदीद-5982

राज्‍य सभा में प्रश्‍न/उत्‍तर

12-दिसंबर-2012 18:21 IST
विधवाओं की पेंशन में आयु सीमा और राशि बढ़ाई गई 
केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्‍य मंत्री श्री लालचंद कटारिया ने आज राज्‍य सभा में एक प्रश्‍न के लिखित उत्‍तर में बताया कि केन्‍द्र ने यह सूचित किया है कि इंदिरा गांधी राष्‍ट्रीय विधवा पेंशन योजना (आईजीएनडब्‍ल्‍यूपीएस) में इस वर्ष पहली अक्‍तूबर से सहायता राशि को 200 रू. से बढ़ाकर 300 रू. प्रतिमाह कर दिया गया है। उक्‍त योजना में अधिकतम आयु को भी 59 वर्ष से बढ़ाकर 79 वर्ष कर दिया गया है। अत: उक्‍त योजना 40-79 वर्ष के आयु समूह में विधवाओं के लिए मान्‍य है और भारत सरकार द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुसार गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों से संबंधित है। उन्‍होंने यह भी बताया कि पेंशन योजनाओं के तहत केन्‍द्रीय सहायता की राशि में संसाधनों की उपलब्‍धता के आधार पर समय-समय पर संशोधन किया जाता है। उन्‍होंने यह भी बताया कि राज्‍यों से यह सिफारिश की गई है कि वे अपने संसाधनों से कम-से-कम समान राशि का योगदान करें। (PIB)
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Saturday, December 8, 2012

राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य बीमा योजना

महिला लाभार्थियों की संख्‍या में वृद्धि
      श्रम पर विशेष लेख                                          *अनिल स्‍वरूप
                  Courtesy Photo
देश के गरीब से गरीब व्‍यक्ति तक स्‍वास्‍थ्‍य बीमा का लाभ पहुंचाने के उद्देश्‍य से वर्ष 2008 में राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य बीमा योजना की शुरूआत की गई थी। 30 सितम्‍बर, 2012 तक इस योजना के अंतर्गत सवा तीन करोड़ स्‍मार्ट कार्डों का वितरण हो चुका है, जिससे लगभग 11 करोड़ लोगों को स्‍वास्‍थ्‍य बीमा का लाभ मिला है। इस योजना में बिना किसी नकद सहायता और दस्‍तावेजों के पारदर्शी तरीके से लोगों को स्‍वास्‍थ्‍य बीमा कवर दिया जा रहा है। योजना की इस पारदर्शिता के लिए देश और विदेश में इस योजना की सराहना हो रही है। संयुक्‍त राष्‍ट्र विकास कार्यक्रम और अंतर्राष्‍ट्रीय श्रम संगठन ने दुनिया भर में सामाजिक सुरक्षा का लाभ पहुंचाने के लिए जो बड़ी 18 योजनाएं शुरू की हैं, यह योजना उनमें से एक है।
    पहली अप्रैल, 2008 को इस योजना की दो जिलों में साधारण सी शुरूआत हुई थी और 31 मार्च, 2012 को इसने चार वर्ष पूरे कर लिए हैं। अब यह योजना 26 राज्‍यों/केन्‍द्रशासित प्रदेशों के 430 से अधिक जिलों में चल रही है। 330 जिलों में इस योजना ने एक वर्ष पूरा कर लिया है। 210 जिलों में इस योजना के दो वर्ष और 50 जिलों में तीन वर्ष पूरे हो चुके हैं।
    जिन 50 जिलों में यह योजना पिछले तीन वर्षों से चल रही है, उनमें एक बहुत ही दिलचस्‍प बात सामने आई है कि इस योजना का लाभ उठाने वालों में महिलाओं की संख्‍या 40 प्रतिशत से बढ़कर 48 प्रतिशत हो गई है।
    योजना की बढ़ती लोकप्रियता के परिणामस्‍वरूप इसका लाभ उठाने वाले लोगों की कुल संख्‍या में भी बढ़ोतरी हुई है। तीन वर्ष पूरे करने वाले 50 जिलों में लाभार्थी परिवारों की संख्‍या में लगातार वृद्धि हुई है और उनकी संख्‍या 59,83,568 से बढ़कर 1,31,77,131 हो गई है। इसमें महत्‍वपूर्ण बात यह है कि इन 50 जिलों में लाभार्थी महिलाओं की संख्‍या पिछले दो वर्षों में 165.2 प्रतिशत बढ़ी है, जबकि लाभार्थी पुरूषों की संख्‍या में 90.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। पिछले दो वर्षों में लाभार्थी महिलाओं की संख्‍या में जो आश्‍चर्यजनक व़द्धि हुई है, उसका कारण पहले वर्ष में महिलाओं को अस्‍पताल से मिलने वाले लाभ, जागरूकता में वृद्धि और आंकड़ा संचय (डाटाबेस) की प्रक्रिया में सुधार है। इन 50 जिलों में, जहां तीन वर्ष पूरे हो गए हैं, यह प्रवृत्ति और भी सुदृढ़ हुई है।
    अस्‍पताल में चिकित्‍सा सेवाओं का लाभ उठाने वालों की संख्‍या में भी वृद्धि हुई है। अस्‍पताल भर्ती की दृष्टि से यदि देखा जाए, तो तीन वर्ष पूरे करने वाले 50‍ जिलों में महिलाओं का अस्‍पताल भर्ती अनुपात पहले वर्ष के 4.58 प्रतिशत से बढ़कर तीसरे वर्ष में 6.68 प्रतिशत हो गया। (अस्‍पताल भर्ती अनुपात की गणना किसी एक वर्ष में अस्‍पताल में भर्तियों की संख्‍या और कुल लाभार्थियों की संख्‍या के अनुपात से की जाती है)।
    लाभार्थियों के पंजीकरण की तरह अस्‍पताल भर्ती संख्‍या में भी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन इसकी दिलचस्‍प बात यह है कि इस योजना के अंतर्गत सेवाओं का लाभ उठाने वाली महिलाओं की संख्‍या में खासी बढ़ोतरी हुई है। हालांकि लाभार्थियों की कुल संख्‍या में महिलाओं के मुकाबले पुरूषों की संख्‍या अधिक है, लेकिन अस्‍पताल भर्ती के लाभ उठाने वाली महिलाओं की संख्‍या पुरूषों से अधिक है। इन 50 जिलों में पिछले दो वर्षों में जहां अस्‍पताल भर्ती सेवाओं का लाभ उठाने वाली महिलाओं की संख्‍या में 286.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई, वहीं पुरूषों की संख्‍या में 140 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
    ये इस योजना के शुरूआती परिणाम हैं और इस दृष्टि से बहुत उत्‍साहजनक हैं कि गरीब से गरीब व्‍यक्ति के लिए भी अस्‍पताल सेवाओं की उपलब्‍धता बढ़ी है। विशेष रूप से महिलाओं ने इस योजना का अधिक लाभ उठाया है। इस योजना के परिणामस्‍वरूप बड़ी संख्‍या में लोगों की जानें बचाई जा सकी हैं। चिकित्‍सा साधनों की कमी के कारण गरीब महिलाएं पहले चुपचाप कष्‍ट झेलती रहती थीं, लेकिन अब वे उपचार के लिए किसी भी सूचीबद्ध सरकारी या गैर-सरकारी स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र पर जा सकती हैं। अस्‍पतालों में उनका स्‍वागत किया जाता है, क्‍योंकि उनके स्‍मार्ट कार्ड में 30 हजार रूपये तक के उपचार के लिए आर्थिक सहायता की व्‍यवस्‍था है।
    जिन राज्‍यों ने राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य बीमा योजना के अंतर्गत महिलाओं का पंजीकरण बढ़ाने और अस्‍पतालों में उपलब्‍ध चिकित्‍सा सेवाओं का लाभ उठाने के लिए महिलाओं को प्रोत्‍साहित करने का सराहनीय कार्य किया है, उन्‍हें सम्‍मानित करने के लिए पुस्‍कार स्‍थापित किया गया है। वर्ष 2011 में यह पुरस्‍कार झारखंड को और वर्ष 2012 में गुजरात को मिला है।
    राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य बीमा योजना के अंतर्गत किस प्रकार से महिलाओं को गुणवत्‍तापूर्ण स्‍वास्‍थ्‍य सेवा उपलब्‍ध कराई जा रही है, इसका आकलन करने के लिए भारत-जर्मन सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम द्वारा मार्च-अप्रैल 2012 में विशेष अध्‍ययन कराया गया। हरियाणा के पलवल और पानीपत जिलों में इस योजना की लाभार्थी महिलाओं और गैर-लाभार्थी महिलाओं के विचार जानने के लिए 10 सामूहिक चर्चाओं का आयोजन किया गया। इस योजना के व्‍यापक प्रभाव का आकलन करने के लिए राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य बीमा योजना के डाटाबेस से उपलब्‍ध आंकड़ों का भी इस्‍तेमाल किया गया।
    अध्‍ययन से पता चला है कि इस राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य बीमा योजना से स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं का लाभ उठाने की दृष्टि से महिलाओं की फैसला लेने की शक्ति और आर्थिक संसाधनों पर नियंत्रण रखने की उनकी योग्‍यता बढ़ी है। इस योजना से बड़ी संख्‍या में महिलाओं के जीवन में सुधार आया है और वे गुणवत्‍तापूर्ण स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने लगीं हैं। 
(पत्र सूचना कार्यालय विशेष लेख)
   (PIB)          07-दिसंबर-2012 13:38 IST 
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-अधिक विवरण के लिए ग्राफ/चार्ट अंग्रेजी फीचर में देखें।
*अतिरिक्‍त सचिव एवं महानिदेशक, श्रम कल्‍याण          
   
        
मीणा/राजगोपाल/यशोदा – 293