Friday, September 7, 2012

कन्याओं का पालन-पोषण

6593 बच्चों को दत्तक ग्रहण हेतु परिवारों को दिया गया 
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा तीरथ ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि भारत सरकार द्वारा अधिसूचित बच्चों के दत्तक ग्रहण हेतु अधिशासी दिशानिर्देश, 2011 के अंतर्गत निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2000 की धारा 41 के तहत गैर-रिश्तेदारी व्यक्तियों द्वारा बच्चों को गोद लिया जा सकता है। इन दिशानिर्देशों के प्रावधानों के अनुसार विशेषज्ञों द्वारा कराए गए गृह अध्ययन के आधार पर संभावित माता-पिता के रूप में दत्तक ग्रहण एजेंसियों में पंजीकृत व्यक्तियों के बच्चों की देखरेख करने हेतु उपयुक्त पाए जाने पर ही वे बच्चों को गोद ले सकते हैं। जनवरी, 2011 से मार्च़ 2012 तक 6593 बच्चों को दत्तक ग्रहण हेतु परिवारों को दिया गया है।
मंत्री महोदया ने कहा कि दत्तक ग्रहण करने वाले माता-पिता को सहायता करने के लिए दत्तक ग्रहण एजेंसी की बाल देखरेख निधि के लिए माता-पिता द्वारा अपेक्षित अंशदान में विशिष्ट परिस्थितियों के मद्देनजर छूट देने की उपर्युक्त दिशानिर्देशों में अनुमति दी गई है। इसके अलावा, समेकित बालक संरक्षण स्कीम जिसके अंतर्गत राज्य सरकारों/संघ राज्य प्रशासनों को मंत्रालय द्वारा अन्य बातों के साथ-साथ दत्तक ग्रहण एजेंसियों के प्रबंधन और उनके साथ रखे गए बच्चों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए निधियां प्रदान की जाती है। यदि गोद लेनेवाले भारतीय माता-पिता भुगतान करने में असमर्थ होते हैं तो कानूनी खर्च के भुगतान हेतु भी अनुदान दिए जाते हैं।(PIB) 
  06-सितम्बर-2012 15:51 IST

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