Friday, September 14, 2012

राज्‍यों के मंत्रियों और सचिवों के सम्‍मेलन का उद्घाटन

पूर्ण महिला शक्ति विकास केंद्रों के विस्‍तार की संभावना बताई
परिव्‍यय में काफी बढ़ोत्‍तरी हो सकती है:महिला/बाल विकास मंत्री
महिला व बाल विकास मन्त्रालय के स्वतंत्र कार्यभार की राज्य मंत्री सुश्री कृष्णा तीर्थ नई दिल्ली में 13 सितम्बर 2012 को  हुए सम्मेलन में संबोधित करते हुए। इन यादगारी पलों को पत्र सूचना कार्यालय के छायाकार ने झट से अपने कैमरे में हमेशा के लिए संजो लिया। 
महिला एवं बाल विकास पर दो दिवसीय सम्मेलन नई दिल्ली में 13 सितम्बर 2012 को शुरू हुआ। इसका उद्घाटन करती हुयीं महिला व बाल विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र कार्यभार) सुश्री कृष्णा तीर्थ ज्योति प्रज्वलित करते हुए। (फोटो पीआईबी)  
महिला और बाल विकास मंत्री ने आज नई दिल्‍ली में विभिन्‍न राज्‍यों के मंत्रियों और सचिवों के दो दिन के सम्‍मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर अपने संबोधन में उन्‍होंने मंत्रालय की स्‍कीमों को सफल बनाने में राज्‍यों की भूमिका को बहुत महत्‍वपूर्ण बताया और कहा कि इस सम्‍मेलन का उददेश्‍य इन स्‍कीमों को लागू करने के बारे में राज्‍यों की राय जानना है क्‍योंकि उनके पूरे सहयोग के बिना मंत्रालय द्वारा तय लक्ष्‍य पूरे नहीं किये जा सकते। उन्‍होंने कहा कि 12वीं योजना तय की जा रही है और हमारे मंत्रालय के परिव्‍यय में काफी बढ़ोत्‍तरी हो सकती है। उन्‍होंने आजमाइश के तौर पर खोल गए पूर्ण महिला शक्ति केंद्रों की चर्चा की और कहा कि इस स्‍कीम की सफलता के लिए कई मंत्रालयों के सहयोग की जरूरत है। महिला और बाल विकास मंत्री ने कहा कि जल्‍दी ही अन्‍य राज्‍यों में ऐसे ही केंद्र खोले जाएंगे। 

झारखंड, छत्‍तीसगढ़ , हरियाणा, पंजाब, बिहार, नगालैंड , नर्इ दिल्‍ली , कर्नाटक, असम, आंध्रप्रदेश और मध्‍य प्रदेश के महिला और बाल विकास से संबद्ध मंत्री और वरिष्‍ठ अधिकारी इस सम्‍मेलन में मौजूद थे। 

सम्‍मेलन में महिला और बाल विकास मंत्रालय के तरफ से एसटीईपी, स्‍वाधार, उज्‍वला जैसे विषयों पर प्रेजेंटेशन दिखाए गए। (पत्र सूचना कार्यालय)

13-सितम्बर-2012 18:51 IST
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Sunday, September 9, 2012

स्‍तनपान–नवजात शिशु के लिए अच्‍छी शुरूआत


स्‍वास्‍थ्‍य पर विशेष लेख                                                संतोष जैन पासी*  वन्‍दना सब्‍बरवाल*

                                                                                                                                                   साभार चित्र 
मां का दूध एक नवजात शिशु के लिए प्राकृतिक और सम्‍पूर्ण आहार होता है। विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन अनुशंसा करता है कि सभी नवजात शिशुओं को छह माह की आयु तक केवल मां का दूध दिया जाना चाहिए और इसे दो साल की आयु तक जारी रखना चाहिए। इसके साथ छह माह की आयु के बाद पर्याप्‍त पोषक पदार्थ भी दिये जाने चाहिए। मां का दूध एक नवजात शिशु को उस समय जब वृद्धि और विकास दर अधिकतम होती है सभी आवश्‍यक पोषक तत्‍व प्रदान करता है। मां के दूध में श्‍वेत रक्‍त कोशिकाएं, कार्बोहाइड्रेट, प्रोट़ीन, गैर प्रोटीन, नाइट्रोजन तत्‍व, जल में घुलनशील विटामिन, लघु पोषक तत्‍व और नवजात शिशु की व़ृद्धि और विकास को बढ़ाने वाले कई अन्‍य जरूरी गैर पोषक तत्‍व भी शामिल होते हैं।

     अन्‍य प्रकारों से दिये गये दूध की तुलना में मां के दूध द्वारा सभी आयु के शिशुओं में कम मृत्‍युदर और अस्‍वस्‍थता देखी गई है। हाल ही में बच्‍चों के बचाव से संबंधित आंकड़ों के अध्‍ययन से यह जाहिर होता है कि पहले छह महीने के लिए सिर्फ मां का दूध पिलाने और छह से ग्‍यारह महीने की अवधि के लिए मां के दूध को जारी रखने से पांच वर्ष से नीचे के शिशुओं की म़ृत्‍यु दर में 13 से 15 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। एक अन्‍य अध्‍ययन के अनुसार सभी नवजात शिशुओं को जन्‍म के पहले दिन से मां का दूध देने से 6 प्रतिशत और जन्‍म के एक घंटे के अन्‍दर मां का दूध दिये जाने से नवजात शिशु म़ृत्‍यु दर में 22 प्रतिशत की कमी की सकती है। मां का दूध कई संक्रमणकारी बीमारियों जिसमें डायरिया और स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी शामिल हैं, से बचाव में मदद के साथ कई स्‍थायी समस्‍याओं जैसे उच्‍च रक्‍तचाप, डायबिटीज, दिल की बीमारियों और कई अन्‍य बीमारियों से बचाव में मदद प्रदान करता है। मां का दूध पीने वाले बच्‍चों में उच्‍च बौद्धिक स्‍तर देखा गया है। यह मां और बच्‍चे के बीच एक भावनात्‍मक बंधन बढ़ाने के साथ उत्‍साह स्‍नेह और प्‍यार बढ़ाता है और इसलिए यह सिर्फ एक भोजन से कहीं अधिक है। मां का दूध साफ, बैक्टीरिया मुक्‍त, संक्रमण रोधी और जब आवश्‍यक हो तब हमेशा तैयार और उचित तापमान में उपलब्‍ध रहता है। इसके अतिरिक्‍त यह किफायती (विशेष तौर पर गरीब लोगों के लिए) और संदूषण से मुक्‍त होता है।

     स्तनपान मां के लिए भी कई स्‍वास्‍थ्‍य लाभ प्रदान करता है। इससे खून की कमी में गिरावट रोकने के साथ-साथ मां को अपना स्‍वाभाविक रूप पुन: प्राप्‍त करने में भी मदद मिलती है। इससे स्‍तन और बच्‍चेदानी के कैंसर से भी सुरक्षा मिलती है। वे माताएं जो अपने शिशुओं को स्तनपान  करातीं हैं वे अपने शिशुओं के साथ व्‍यवहारिक तालमेल और शिशु के पालन पोषण के संबंध में बेहतर नजर आतीं हैं। स्‍तनपान समाज के लिए भी लाभदायक है, क्‍योंकि इससे बच्‍चों की बीमारी में कमी आती है और परिवार पर पड़ने वाले वित्‍तीय दबाव को कम करने में मदद मिलती है। स्तनपान कराने से बच्‍चों के कम बीमार पड़ने के कारण माताएं अपने कार्य को अधिक कुशलता से कर सकतीं हैं अपने नियोक्‍ता के लाभ में वृद्धि करतीं हैं। इसलिए मां के प्‍यार के समान स्तनपान का कोई विकल्‍प नहीं है।       (पत्र सूचना कार्यालय)     07-सितम्बर-2012 19:45 IST

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1 से 7 सितम्‍बर राष्‍ट्रीय पोषक सप्‍ताह के रूप में मनाया जाता है
*  इंस्‍टीट्यूट ऑफ होम इकनॉमिक्‍स में एसोसिएट प्रोफेसर  (पोषण)
*  इंस्‍टीट्यूट ऑफ होम इकनॉमिक्‍स में अनुसंधान शोधार्थी
लेख में व्‍यक्‍त किये गये विचार लेखक के अपने हैं और यह जरूरी नहीं है कि पत्र सूचना कार्यालय इनसे सहमत हो

Friday, September 7, 2012

कन्याओं का पालन-पोषण

6593 बच्चों को दत्तक ग्रहण हेतु परिवारों को दिया गया 
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा तीरथ ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि भारत सरकार द्वारा अधिसूचित बच्चों के दत्तक ग्रहण हेतु अधिशासी दिशानिर्देश, 2011 के अंतर्गत निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2000 की धारा 41 के तहत गैर-रिश्तेदारी व्यक्तियों द्वारा बच्चों को गोद लिया जा सकता है। इन दिशानिर्देशों के प्रावधानों के अनुसार विशेषज्ञों द्वारा कराए गए गृह अध्ययन के आधार पर संभावित माता-पिता के रूप में दत्तक ग्रहण एजेंसियों में पंजीकृत व्यक्तियों के बच्चों की देखरेख करने हेतु उपयुक्त पाए जाने पर ही वे बच्चों को गोद ले सकते हैं। जनवरी, 2011 से मार्च़ 2012 तक 6593 बच्चों को दत्तक ग्रहण हेतु परिवारों को दिया गया है।
मंत्री महोदया ने कहा कि दत्तक ग्रहण करने वाले माता-पिता को सहायता करने के लिए दत्तक ग्रहण एजेंसी की बाल देखरेख निधि के लिए माता-पिता द्वारा अपेक्षित अंशदान में विशिष्ट परिस्थितियों के मद्देनजर छूट देने की उपर्युक्त दिशानिर्देशों में अनुमति दी गई है। इसके अलावा, समेकित बालक संरक्षण स्कीम जिसके अंतर्गत राज्य सरकारों/संघ राज्य प्रशासनों को मंत्रालय द्वारा अन्य बातों के साथ-साथ दत्तक ग्रहण एजेंसियों के प्रबंधन और उनके साथ रखे गए बच्चों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए निधियां प्रदान की जाती है। यदि गोद लेनेवाले भारतीय माता-पिता भुगतान करने में असमर्थ होते हैं तो कानूनी खर्च के भुगतान हेतु भी अनुदान दिए जाते हैं।(PIB) 
  06-सितम्बर-2012 15:51 IST

विधवाओं के लिए योजनाएं

गरीब परिवारों की 40-59 वर्ष की आयु की विधवाओं को पेंशन
                                                                                                                                                                                     साभार चित्र 
ग्रामीण विकास राज्‍य मंत्री श्री प्रदीप जैन 'आदित्‍य' ने आज लोकसभा में एक प्रश्‍न के लिखित उत्‍तर में बताया कि इंदिरा गांधी राष्‍ट्रीय विधवा पेंशन योजना (आईजीएनडब्‍ल्‍यूपीएस) का कार्यान्‍वयन ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में किया जाता है ताकि गरीबी की रेखा से नीचे जीवन बसर करने वाले परिवारों की 40-59 वर्ष की आयु की विधवाओं को पेंशन दी जा सके। मंत्रालय राज्‍य सरकारों के जरिए मजदूरी रोजगार के लिए महात्‍मा गांधी राष्‍ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) तथा देश के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली विधवाओं सहित निर्धन परिवारों के स्‍व-रोजगार के लिए स्‍वर्णजयंती ग्राम स्‍वरोजगार योजना (एसजीएसवाई)/ राष्‍ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम)/ आजीविका नामक प्रमुख योजनाओं को भी क्रियान्वित करता है। चालू वित्‍त वर्ष (अर्थात 2012-13) के दौरान मनरेगा और एसजीएसवाई/एनआरएलएम के अंतर्गत किया गया बजट प्रावधान क्रमश: 33,000 करोड़ रुपये और 3515 करोड़ रुपये है। वित्‍त मंत्रालय द्वारा राज्‍य सरकारों को आईजीएनडब्‍ल्‍यूपीएस के अंतर्गत अतिरिक्‍त केन्‍द्रीय सहायता (एसीए) के रूप में निधियां रिलीज की जाती हैं। (PIB06-सितम्बर-2012 19:10 IST

Thursday, September 6, 2012

मकसद:महिलाओं को सम्‍मान की आजीविका


डॉ. फारूख अब्‍दुल्‍ला ने लॉन्‍च किया पर्यावरण अनुकूल इलेक्‍ट्रिक रिक्‍शा
सामाजिक और आर्थिक हैसियत में गहरे लिंग-भेद को मिटाने की दिशा में पहल करते हुए केन्‍द्रीय नवीन एवं नवीकरण उर्जा मंत्री डॉ. फारूख अब्‍दुल्‍ला ने आर्थिक रूप से पिछड़ी महिलाओं को सशक्‍त करने के लिए आज ‘उम्‍मीद की इलेक्ट्रिक रिक्‍शा’ का वितरण किया। दिल्‍ली के जामिया नगर में आयोजित एक कार्यक्रम में डॉ. फारूख अब्‍दुल्‍ला ने 33 साल की महिला कोहिनूर को पहली इलेक्ट्रिक रिक्‍शा सौंपी। कोहिनूर दो बच्‍चों की अकेली मां है और साथ में उनकी बूढ़ी मां भी रहती हैं।

इस मौके पर डॉ. फारूख अब्‍दुल्‍ला ने कहा कि वे कोहिनूर को उम्‍मीद की पहली रिक्‍शा सौंपकर काफी खुश हैं। देखने में ये रिक्‍शा काफी सुन्‍दर है, इसे चलाना आसान है और इससे कोई प्रदूषण नहीं होता है। उन्‍होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों के बीच इलेक्‍ट्रिक रिक्‍शा एक अच्‍छा विकल्‍प है। साथ ही डॉ. फारूख ने वहाँ मौजूद लोगों से कहा कि घर-घर सोलर वाटर हीटर पहुंचाने में भी उनका मंत्रालय पूरा सहयोग करेगा।

इस पहल में आर्थिक और सामाजिक रूप से दरकिनार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए काम कर रही उम्‍मीद और सेंटर फॉर इक्विटी और एन्‍क्‍लुजन संस्‍था भी भागीदार है। इस पहल का मकसद पर्यावरण अनुकूल इस इलेक्ट्रिक रिक्‍शे से महिलाओं को इज्‍जत की रोटी कमाने का मौका उपलब्‍ध कराना है। उम्‍मीद संस्‍था ने इसके लिए महिलाओं को प्रशिक्षित करने और रिक्‍शे के रख-रखाव का भी वादा किया है। (पीआईबी)
                                              06-सितम्बर-2012 20:44 IST
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