Saturday, December 15, 2012

ग्रामीण महिलाओं का सशक्तिकरण

40 %महिलाएं शारीरिक अथवा यौन हिंसा से पीडि़त-कृष्‍णा तीरथ 
महिला और बाल विकास राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्‍णा तीरथ ने आज लोक सभा में एक प्रश्‍न के लिखित उत्‍तर में बताया कि राष्‍ट्रीय परिवार स्‍वास्‍थ्‍य सर्वेक्षण-।।। (2005-06) के आंकड़ों के अनुसार 15-49 आयु वर्ग में 35.4 प्रतिशत महिलाएं तथा विवाहित महिलाओं के मामले में लगभग 40 प्रतिशत महिलाएं शारीरिक अथवा यौन हिंसा से पीडि़त हैं। इसके अतिरिक्‍त, आंकड़े दर्शाते हैं कि महिलाओं के विरूद्ध घरेलू हिंसा के शारीरिक तथा यौन दोनों रूप, शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक हैं। 

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय देश में महिलाओं के आर्थिक सशक्‍तीकरण के लिए निम्‍नलिखित स्‍कीमों का संचालन कर रहा है- 

1 राष्‍ट्रीय महिला सशक्‍तीकरण मिशन (एनएमईडब्‍ल्‍यू) : महिलाओं को व्‍यापक रूप से सशक्‍त करने के लिए भारत सरकार का एक प्रयास है। यह एक केन्‍द्रीय प्रायोजित स्‍कीम है, जो अप्रैल, 2011 में स्‍वीकृत की गई थी जिसमें अंतर क्षेत्रीय अभिबिंदुता को सुदृढ करना अनिवार्य है। 

2 महिलाओं हेतु प्रशिक्षण एवं रोजगार कार्यक्रम के लिए सहायता (स्‍टेप) वर्ष 1986-87 के दौरान केन्‍द्रीय क्षेत्र स्‍कीम के रूप में आरंभ की गई थी। इसका उद्देश्‍य स्‍व-रोजगार तथा मजदूरी रोजगार के लिए कौशलों को उन्‍नयन करते हुए महिलाओं पर महत्‍वपूर्ण प्रभाव डालना है। लक्षित वर्ग में ग्रामीण वंचित सम्‍पत्ति विहीन महिलाएं तथा शहरी गरीब महिलाओं को शामिल किया गया है। 

3 100 करोड़ रूपये की कोरपस में राष्‍ट्रीय महिला कोष (आरएमके) गरीब महिलाओं का सामाजिक आर्थिक उत्‍थान करने के लिए सूक्ष्‍म वित्‍त सेवाएं प्रदान करता है। 
4 प्रियदर्शनी, एक स्‍व-सहायता ग्रुप (एसएचजी) है जो महिलाओं तथा किशोरियों के व्‍यापक सशक्‍तीकरण के लिए परियोजना आधारित है। यह स्‍कीम उत्‍तर प्रदेश तथा बिहार के मध्‍य गंगा के मैदानी क्षेत्रों के 7 जिलों में क्रियान्वित की जा रही है। (PIB) 14-दिसंबर-2012 15:31 IST
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मीणा/बिष्‍ट/चन्‍द्रकला-6106

बाल विकास योजनाएं

33 सामुदायिक विकास ब्‍लाकों तथा 4891 सामुदायिक केन्‍द्रों में विस्‍तार
महिला और बाल विकास राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्‍णा तीरथ ने आज लोक सभा में एक प्रश्‍न के लिखित उत्‍तर में बताया कि समेकित बाल विकास सेवा स्‍कीम (आईसीडीएस) 6 वर्ष से कम उम्र के बच्‍चों तथा गर्भवती और धात्री माताओं के स्‍वास्‍थ्‍य पोषण और विकास की आवश्‍यकताओं को पूरा करने के लिए सरकार का एक प्रमुख कार्यक्रम है। स्‍कीम के अन्‍य उद्देश्‍य बाल विकास को प्रोन्‍नत करने के लिए उनकी मृत्‍यु दर, रूग्‍णता, कुपोषण और स्‍कूल छोड़ दिए जाने की घटनाओं में कमी तथा विभिन्‍न्‍ विभागों के बीच नीतियों का प्रभावी समन्‍वयन और क्रियान्‍वयन है। 

बच्‍चों की मृत्‍यु दर में कमी लाने के लिए आईसीडीएस के अतिरिक्‍त सरकार द्वारा स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय के राष्‍ट्रीय ग्रामीण स्‍वास्‍थ्‍य मिशन के प्रजनन एवं बाल स्‍वास्‍थ्‍य कार्यक्रम के तहत विभिन्‍न उपाय क्रियान्वित किए जा रहे हैं। इसमें समेकित नवजात तथा बाल्‍यावस्‍था रूग्‍णता प्रबंधन विशेष नवजात देखरेख यूनिट और पोषण पुनर्वास केन्‍द्रों सहित जननी शिशु सुरक्षा योजना, नवजात शिशु सुरक्षा कार्यक्रम शामिल है। 

अपने परिचालन के 35 वर्षों में, आईसीडीएस जिसका 1975 में चयनित 33 सामुदायिक विकास ब्‍लाकों तथा 4891 सामुदायिक केन्‍द्रों में विस्‍तार किया गया था, 2008-09 में अनुमोदित किए गए सर्वसुलभीकरण के अंतिम चरण के साथ पूरे देश में 7076 अनुमोदित परिययोजनाओं तथा 14 लाख आंगनवाड़ी केन्‍द्रों के माध्‍यम से सर्वसुलभीकरण हो गया है। तथापि, इसका अधिकांश विस्‍तार (50 प्रतिशत से भी अधिक) 2005 के बाद ही हुआ है। अपनी निर्दिष्‍ट सीमाओं में, कुपोषण की व्‍यप्‍तता जो 1998-99 (एनएफएचएस-2) में 42.7 प्रतिशत थी वर्ष 2005-06 (एनएफएचएस-3) में घटकर 40.4 प्रतिशत हो गई। राष्‍ट्रीय परिवार स्‍वास्‍थ्‍य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-3) सहित अनेक अध्‍ययनों से यह स्‍पष्‍ट होता है कि इस कार्यक्रम ने बाल-कुपोषण में कमी, देखरेख की पद्धतियों में आईएमआर और 5 वर्ष से कम उम्र के बच्‍चों की मृत्‍यु दर में कमी, सुधार तथा गुणवत्‍ता पूर्ण स्‍कूल-पूर्व शिक्षा सहित उन्‍नत प्रारंभिक बाल्‍यावस्‍था विकास परिणामों जैसे कुछेक प्रमुख कार्यक्रम के उद्देश्‍यों को प्राप्‍त करने की दिशा में सकारात्‍मक योगदान दिया है। 
(PIB)   14-दिसंबर-2012 15:39 IST

मीणा/बिष्‍ट/चन्‍द्रकला-6107

सबला योजना

पूरे देश में राजीव गांधी किशोरी सशक्‍तीकरण स्‍कीम-सबला 
महिला और बाल विकास राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्रीम‍ती कृष्‍णा तीरथ ने आज लोक सभा में सबला योजना के बारे में पूछे गए एक प्रश्‍न के लिखित उत्‍तर में बताया कि आंध्र प्रदेश और महाराष्‍ट्र सहित पूरे देश में राजीव गांधी किशोरी सशक्‍तीकरण स्‍कीम-सबला के कार्य निष्‍पादन का मानीटरन राज्‍यों/संघ राज्‍य क्षेत्रों द्वारा प्रस्‍तुत आवधिक वास्‍तविक और वित्‍तीय प्रगति रिपोर्टों (तिमाही और वार्षिक) के माध्‍यम से की भी जाती है। राष्‍ट्रीय, राज्‍य और सामुदायिक स्‍तर पर समेकित बाल विकास सेवा स्‍कीम के अंतर्गत स्‍थापित मानीटरन और पर्यवेक्षण तंत्र का उपयोग सबला स्‍कीम के मानीटरन के लिए भी किया जाता है। इस स्‍कीम के अंतर्गत सरकार द्वारा प्रगति की समीक्षा भी राज्‍य सरकारों/संघ राज्‍य प्रशासनों के साथ समीक्षा बैठकों तथा क्षेत्रीय दौरों में की जाती है। इसके अतिरिक्‍त स्‍कीम के अंतर्गत प्रगति की समीक्षा, मानीटरन करने, क्रियान्‍वयन में आने वाली बाधाओं की समीक्षा करने और उनका समाधान करने हेतु उपयुक्‍त तंत्र इजात करने के लिए राष्‍ट्र, राज्‍य, ब्‍लॉक और ग्राम स्‍तर पर सबला हेतु मानीटरन और पर्यवेक्षण समितियां गठित की गई हैं। वर्तमान में सबला का क्रियान्‍वयन प्रायोगिक आधार पर देश के 205 जिलों में किया जा रहा है। सरकार ने एडमिनिस्‍ट्रेटिव स्‍टॉफ कॉलेज ऑफ इण्डिया, हैदराबाद, आंध्र प्रदेश के द्वारा 11वीं योजना (2010-11 और 2011-12) के कार्य निष्‍पादन के बारे में सबला का स्‍वतंत्र रूप से मूल्‍यांकन करने के आदेश दिए हैं। स्‍कीम का आगे का विस्‍तार और प्रसार मूल्‍यांकन के निष्‍कर्षों पर निर्भर करेगा। 

उन्‍होंने यह भी जानकारी दी कि सरकार द्वारा स्‍कीम के कारगर क्रियान्‍वयन हेतु निम्‍नलिखित कदम उठाए गए हैं:- राज्‍यों/संघ राज्‍य क्षेत्रों को समय पर निधियां निर्मुक्‍त करना, स्‍कीम के अंतर्गत खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के माध्‍यम से गरीबी रेखा के नीचे रहने वालों की दर से खाद्यान्‍न का आबंटन, सबला के अंतर्गत गैर-पोषण घटक के क्रियान्‍वयन हेतु स्‍वास्‍थ्‍य, शिक्षा, युवा कार्य, श्रम और रोजगार तथा पंचायती राज संस्‍थाओं की विभिन्‍न स्‍कीमों/कार्यक्रमों के साथ सेवाओं का कारगर संकेन्‍द्रण सुनिश्चित करना, राज्‍यों/संघ राज्‍य क्षेत्रों द्वारा प्रस्‍तुत आवधिक वास्‍तविक और वित्‍तीय प्रगति रिपोर्टों के माध्‍यम से स्‍कीम के क्रियान्‍वयन का मानीटरन, राज्‍यों/संघ राज्‍य क्षेत्रों के साथ समीक्षा बैठकें आयोजित करना सबला के लिए गठित राष्‍ट्रीय मानीटरन और पर्यवेक्षण समिति की बैठकें करना एवं स्‍कीम के मानदंडों के अनुसार इसके क्रियान्‍वयन की समीक्षा करने हेतु क्षेत्रीय दौरे करना। (PIB
14-दिसंबर-2012 17:58 IST

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वि.कासोटिया/इंद्रपाल/रामकिशन-6112

Wednesday, December 12, 2012

महिलाओं की समस्या का समाधान करने के लिए हेल्पलाइन

40 प्रतिशत महिलाएं शारीरिक अथवा यौन हिंसाओं की शिकार
Photo Courtesy Indore Police
महिला और बाल विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा तीरथ ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-।।। (2005-06) के आंकड़ों के अनुसार 15-49 आयु वर्ग की 35.4 प्रतिशत कुल विवाहित महिलाओं में लगभग 40 प्रतिशत महिलाएं शारीरिक अथवा यौन हिंसाओं की शिकार हुई हैं। 6.7 प्रतिशत महिलाएं घरेलू हिंसा के दोनों रूपों शारीरिक एवं यौन हिंसा का शिकार हुई हैं। इसके अलावा, आंकड़ों से यह पता चलता है कि घरेलू हिंसा के दोनों रूपों शारीरिक एवं यौन हिंसा की घटनाएं शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक हैं।
12वीं पंचवर्षीय योजना हेतु महिला एजेंसी एवं सशक्तीकरण पर योजना आयोग द्वारा गठित कार्यदल तथा 12वीं पंचवर्षीय योजना हेतु महिला एजेंसी एवं बाल अधिकार पर संचालन समिति ने महिला हैल्पलाइऩ की स्थापना की अनुशंसा की है। तथापि, सरकार ने सरकार के अंदर निहित मूल्यांकन तंत्र द्वारा मूल्यांकन सहित इस नई स्कीम को शुरू करने का निर्णय नहीं लिया है।
(PIB)  12-दिसंबर-2012 15:11 IST
मीणा/बिष्ट/शदीद-5982

राज्‍य सभा में प्रश्‍न/उत्‍तर

12-दिसंबर-2012 18:21 IST
विधवाओं की पेंशन में आयु सीमा और राशि बढ़ाई गई 
केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्‍य मंत्री श्री लालचंद कटारिया ने आज राज्‍य सभा में एक प्रश्‍न के लिखित उत्‍तर में बताया कि केन्‍द्र ने यह सूचित किया है कि इंदिरा गांधी राष्‍ट्रीय विधवा पेंशन योजना (आईजीएनडब्‍ल्‍यूपीएस) में इस वर्ष पहली अक्‍तूबर से सहायता राशि को 200 रू. से बढ़ाकर 300 रू. प्रतिमाह कर दिया गया है। उक्‍त योजना में अधिकतम आयु को भी 59 वर्ष से बढ़ाकर 79 वर्ष कर दिया गया है। अत: उक्‍त योजना 40-79 वर्ष के आयु समूह में विधवाओं के लिए मान्‍य है और भारत सरकार द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुसार गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों से संबंधित है। उन्‍होंने यह भी बताया कि पेंशन योजनाओं के तहत केन्‍द्रीय सहायता की राशि में संसाधनों की उपलब्‍धता के आधार पर समय-समय पर संशोधन किया जाता है। उन्‍होंने यह भी बताया कि राज्‍यों से यह सिफारिश की गई है कि वे अपने संसाधनों से कम-से-कम समान राशि का योगदान करें। (PIB)
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Saturday, December 8, 2012

राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य बीमा योजना

महिला लाभार्थियों की संख्‍या में वृद्धि
      श्रम पर विशेष लेख                                          *अनिल स्‍वरूप
                  Courtesy Photo
देश के गरीब से गरीब व्‍यक्ति तक स्‍वास्‍थ्‍य बीमा का लाभ पहुंचाने के उद्देश्‍य से वर्ष 2008 में राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य बीमा योजना की शुरूआत की गई थी। 30 सितम्‍बर, 2012 तक इस योजना के अंतर्गत सवा तीन करोड़ स्‍मार्ट कार्डों का वितरण हो चुका है, जिससे लगभग 11 करोड़ लोगों को स्‍वास्‍थ्‍य बीमा का लाभ मिला है। इस योजना में बिना किसी नकद सहायता और दस्‍तावेजों के पारदर्शी तरीके से लोगों को स्‍वास्‍थ्‍य बीमा कवर दिया जा रहा है। योजना की इस पारदर्शिता के लिए देश और विदेश में इस योजना की सराहना हो रही है। संयुक्‍त राष्‍ट्र विकास कार्यक्रम और अंतर्राष्‍ट्रीय श्रम संगठन ने दुनिया भर में सामाजिक सुरक्षा का लाभ पहुंचाने के लिए जो बड़ी 18 योजनाएं शुरू की हैं, यह योजना उनमें से एक है।
    पहली अप्रैल, 2008 को इस योजना की दो जिलों में साधारण सी शुरूआत हुई थी और 31 मार्च, 2012 को इसने चार वर्ष पूरे कर लिए हैं। अब यह योजना 26 राज्‍यों/केन्‍द्रशासित प्रदेशों के 430 से अधिक जिलों में चल रही है। 330 जिलों में इस योजना ने एक वर्ष पूरा कर लिया है। 210 जिलों में इस योजना के दो वर्ष और 50 जिलों में तीन वर्ष पूरे हो चुके हैं।
    जिन 50 जिलों में यह योजना पिछले तीन वर्षों से चल रही है, उनमें एक बहुत ही दिलचस्‍प बात सामने आई है कि इस योजना का लाभ उठाने वालों में महिलाओं की संख्‍या 40 प्रतिशत से बढ़कर 48 प्रतिशत हो गई है।
    योजना की बढ़ती लोकप्रियता के परिणामस्‍वरूप इसका लाभ उठाने वाले लोगों की कुल संख्‍या में भी बढ़ोतरी हुई है। तीन वर्ष पूरे करने वाले 50 जिलों में लाभार्थी परिवारों की संख्‍या में लगातार वृद्धि हुई है और उनकी संख्‍या 59,83,568 से बढ़कर 1,31,77,131 हो गई है। इसमें महत्‍वपूर्ण बात यह है कि इन 50 जिलों में लाभार्थी महिलाओं की संख्‍या पिछले दो वर्षों में 165.2 प्रतिशत बढ़ी है, जबकि लाभार्थी पुरूषों की संख्‍या में 90.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। पिछले दो वर्षों में लाभार्थी महिलाओं की संख्‍या में जो आश्‍चर्यजनक व़द्धि हुई है, उसका कारण पहले वर्ष में महिलाओं को अस्‍पताल से मिलने वाले लाभ, जागरूकता में वृद्धि और आंकड़ा संचय (डाटाबेस) की प्रक्रिया में सुधार है। इन 50 जिलों में, जहां तीन वर्ष पूरे हो गए हैं, यह प्रवृत्ति और भी सुदृढ़ हुई है।
    अस्‍पताल में चिकित्‍सा सेवाओं का लाभ उठाने वालों की संख्‍या में भी वृद्धि हुई है। अस्‍पताल भर्ती की दृष्टि से यदि देखा जाए, तो तीन वर्ष पूरे करने वाले 50‍ जिलों में महिलाओं का अस्‍पताल भर्ती अनुपात पहले वर्ष के 4.58 प्रतिशत से बढ़कर तीसरे वर्ष में 6.68 प्रतिशत हो गया। (अस्‍पताल भर्ती अनुपात की गणना किसी एक वर्ष में अस्‍पताल में भर्तियों की संख्‍या और कुल लाभार्थियों की संख्‍या के अनुपात से की जाती है)।
    लाभार्थियों के पंजीकरण की तरह अस्‍पताल भर्ती संख्‍या में भी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन इसकी दिलचस्‍प बात यह है कि इस योजना के अंतर्गत सेवाओं का लाभ उठाने वाली महिलाओं की संख्‍या में खासी बढ़ोतरी हुई है। हालांकि लाभार्थियों की कुल संख्‍या में महिलाओं के मुकाबले पुरूषों की संख्‍या अधिक है, लेकिन अस्‍पताल भर्ती के लाभ उठाने वाली महिलाओं की संख्‍या पुरूषों से अधिक है। इन 50 जिलों में पिछले दो वर्षों में जहां अस्‍पताल भर्ती सेवाओं का लाभ उठाने वाली महिलाओं की संख्‍या में 286.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई, वहीं पुरूषों की संख्‍या में 140 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
    ये इस योजना के शुरूआती परिणाम हैं और इस दृष्टि से बहुत उत्‍साहजनक हैं कि गरीब से गरीब व्‍यक्ति के लिए भी अस्‍पताल सेवाओं की उपलब्‍धता बढ़ी है। विशेष रूप से महिलाओं ने इस योजना का अधिक लाभ उठाया है। इस योजना के परिणामस्‍वरूप बड़ी संख्‍या में लोगों की जानें बचाई जा सकी हैं। चिकित्‍सा साधनों की कमी के कारण गरीब महिलाएं पहले चुपचाप कष्‍ट झेलती रहती थीं, लेकिन अब वे उपचार के लिए किसी भी सूचीबद्ध सरकारी या गैर-सरकारी स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र पर जा सकती हैं। अस्‍पतालों में उनका स्‍वागत किया जाता है, क्‍योंकि उनके स्‍मार्ट कार्ड में 30 हजार रूपये तक के उपचार के लिए आर्थिक सहायता की व्‍यवस्‍था है।
    जिन राज्‍यों ने राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य बीमा योजना के अंतर्गत महिलाओं का पंजीकरण बढ़ाने और अस्‍पतालों में उपलब्‍ध चिकित्‍सा सेवाओं का लाभ उठाने के लिए महिलाओं को प्रोत्‍साहित करने का सराहनीय कार्य किया है, उन्‍हें सम्‍मानित करने के लिए पुस्‍कार स्‍थापित किया गया है। वर्ष 2011 में यह पुरस्‍कार झारखंड को और वर्ष 2012 में गुजरात को मिला है।
    राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य बीमा योजना के अंतर्गत किस प्रकार से महिलाओं को गुणवत्‍तापूर्ण स्‍वास्‍थ्‍य सेवा उपलब्‍ध कराई जा रही है, इसका आकलन करने के लिए भारत-जर्मन सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम द्वारा मार्च-अप्रैल 2012 में विशेष अध्‍ययन कराया गया। हरियाणा के पलवल और पानीपत जिलों में इस योजना की लाभार्थी महिलाओं और गैर-लाभार्थी महिलाओं के विचार जानने के लिए 10 सामूहिक चर्चाओं का आयोजन किया गया। इस योजना के व्‍यापक प्रभाव का आकलन करने के लिए राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य बीमा योजना के डाटाबेस से उपलब्‍ध आंकड़ों का भी इस्‍तेमाल किया गया।
    अध्‍ययन से पता चला है कि इस राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य बीमा योजना से स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं का लाभ उठाने की दृष्टि से महिलाओं की फैसला लेने की शक्ति और आर्थिक संसाधनों पर नियंत्रण रखने की उनकी योग्‍यता बढ़ी है। इस योजना से बड़ी संख्‍या में महिलाओं के जीवन में सुधार आया है और वे गुणवत्‍तापूर्ण स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने लगीं हैं। 
(पत्र सूचना कार्यालय विशेष लेख)
   (PIB)          07-दिसंबर-2012 13:38 IST 
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-अधिक विवरण के लिए ग्राफ/चार्ट अंग्रेजी फीचर में देखें।
*अतिरिक्‍त सचिव एवं महानिदेशक, श्रम कल्‍याण          
   
        
मीणा/राजगोपाल/यशोदा – 293

Friday, October 5, 2012

बोधिसत्व कस्तूरिया की और कविता


Fri, Oct 5, 2012 at 1:26 PM
इक दिन एक नन्ही परी, जब मेरे आँगन मे आई!
सारे घर मे खुशियाँ गूंजी, ओर बाज उठी शहनाई!!
किलकारी से महका आँगन,उपवन मे छाई तरुणाई,
फ़िर मीठे तुतले बोलों से,पुरखों की बगिया महकाई!! 

इक दिन एक नन्ही परी,
पता नही संग सहेली ,कब विद्द्यालय की दौड लगाई,
धीरे-धीरे यौवन की पाँखुर, लेने लगी नई अरुणाई !! 

इक दिन एक नन्ही परी,
स्वप्न सलोने लगी सजाने,पौढी पर बारात जो आई,
सबकी आँखो मे अश्रुधार थी,घडी विदा की जब आई!! 

इक दिन एक नन्ही परी, 
चार दिना भी बीते नही ,दहेज़ लोलुपों ने कार मंगाई,
कैसे अम्मा-बाबू से कहती,खामोश सह्ती रही पिटाई!! 

इक दिन एक नन्ही परी,
घर-घर परियो की यही कहानी,मुझको दे रही सुनाई,
किससे मनुहार करे?सारे अब तो मुझको लगें कसाई!! 

इक दिन एक नन्ही परी,
उस दिन आँखे पथराय गई,तलाक नोटिस दिया सुनाई,
कोर्ट-कचहरी सब बेमानी, लगी गाँठ सुलझे न सुलझाई!! 

इक दिन एक नन्ही परी, 
पर वो भारत की नारी है, उसने फ़िर हार नही अपनाई,
तन-मन-धन से फ़िर शुरू की, उसने आगे अपनी पढाई!! 

इक दिन एक नन्ही परी,
मन मे इक विश्वास जगा ,अद्ध्यन से नही बडी कमाई,
अद्ध्य्यन अध्यापन से नारी मे, उसने नई अलख जगाई!!

इक दिन एक नन्ही परी,
जन -सेवा संकल्प लिया ,सरकारी नौकरी की करी पढाई,
आज सभी उसके गुण गाते, खाते उसी की गाढी कमाई !!

इक दिन एक नन्ही परी,
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७

Friday, September 14, 2012

राज्‍यों के मंत्रियों और सचिवों के सम्‍मेलन का उद्घाटन

पूर्ण महिला शक्ति विकास केंद्रों के विस्‍तार की संभावना बताई
परिव्‍यय में काफी बढ़ोत्‍तरी हो सकती है:महिला/बाल विकास मंत्री
महिला व बाल विकास मन्त्रालय के स्वतंत्र कार्यभार की राज्य मंत्री सुश्री कृष्णा तीर्थ नई दिल्ली में 13 सितम्बर 2012 को  हुए सम्मेलन में संबोधित करते हुए। इन यादगारी पलों को पत्र सूचना कार्यालय के छायाकार ने झट से अपने कैमरे में हमेशा के लिए संजो लिया। 
महिला एवं बाल विकास पर दो दिवसीय सम्मेलन नई दिल्ली में 13 सितम्बर 2012 को शुरू हुआ। इसका उद्घाटन करती हुयीं महिला व बाल विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र कार्यभार) सुश्री कृष्णा तीर्थ ज्योति प्रज्वलित करते हुए। (फोटो पीआईबी)  
महिला और बाल विकास मंत्री ने आज नई दिल्‍ली में विभिन्‍न राज्‍यों के मंत्रियों और सचिवों के दो दिन के सम्‍मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर अपने संबोधन में उन्‍होंने मंत्रालय की स्‍कीमों को सफल बनाने में राज्‍यों की भूमिका को बहुत महत्‍वपूर्ण बताया और कहा कि इस सम्‍मेलन का उददेश्‍य इन स्‍कीमों को लागू करने के बारे में राज्‍यों की राय जानना है क्‍योंकि उनके पूरे सहयोग के बिना मंत्रालय द्वारा तय लक्ष्‍य पूरे नहीं किये जा सकते। उन्‍होंने कहा कि 12वीं योजना तय की जा रही है और हमारे मंत्रालय के परिव्‍यय में काफी बढ़ोत्‍तरी हो सकती है। उन्‍होंने आजमाइश के तौर पर खोल गए पूर्ण महिला शक्ति केंद्रों की चर्चा की और कहा कि इस स्‍कीम की सफलता के लिए कई मंत्रालयों के सहयोग की जरूरत है। महिला और बाल विकास मंत्री ने कहा कि जल्‍दी ही अन्‍य राज्‍यों में ऐसे ही केंद्र खोले जाएंगे। 

झारखंड, छत्‍तीसगढ़ , हरियाणा, पंजाब, बिहार, नगालैंड , नर्इ दिल्‍ली , कर्नाटक, असम, आंध्रप्रदेश और मध्‍य प्रदेश के महिला और बाल विकास से संबद्ध मंत्री और वरिष्‍ठ अधिकारी इस सम्‍मेलन में मौजूद थे। 

सम्‍मेलन में महिला और बाल विकास मंत्रालय के तरफ से एसटीईपी, स्‍वाधार, उज्‍वला जैसे विषयों पर प्रेजेंटेशन दिखाए गए। (पत्र सूचना कार्यालय)

13-सितम्बर-2012 18:51 IST
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Sunday, September 9, 2012

स्‍तनपान–नवजात शिशु के लिए अच्‍छी शुरूआत


स्‍वास्‍थ्‍य पर विशेष लेख                                                संतोष जैन पासी*  वन्‍दना सब्‍बरवाल*

                                                                                                                                                   साभार चित्र 
मां का दूध एक नवजात शिशु के लिए प्राकृतिक और सम्‍पूर्ण आहार होता है। विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन अनुशंसा करता है कि सभी नवजात शिशुओं को छह माह की आयु तक केवल मां का दूध दिया जाना चाहिए और इसे दो साल की आयु तक जारी रखना चाहिए। इसके साथ छह माह की आयु के बाद पर्याप्‍त पोषक पदार्थ भी दिये जाने चाहिए। मां का दूध एक नवजात शिशु को उस समय जब वृद्धि और विकास दर अधिकतम होती है सभी आवश्‍यक पोषक तत्‍व प्रदान करता है। मां के दूध में श्‍वेत रक्‍त कोशिकाएं, कार्बोहाइड्रेट, प्रोट़ीन, गैर प्रोटीन, नाइट्रोजन तत्‍व, जल में घुलनशील विटामिन, लघु पोषक तत्‍व और नवजात शिशु की व़ृद्धि और विकास को बढ़ाने वाले कई अन्‍य जरूरी गैर पोषक तत्‍व भी शामिल होते हैं।

     अन्‍य प्रकारों से दिये गये दूध की तुलना में मां के दूध द्वारा सभी आयु के शिशुओं में कम मृत्‍युदर और अस्‍वस्‍थता देखी गई है। हाल ही में बच्‍चों के बचाव से संबंधित आंकड़ों के अध्‍ययन से यह जाहिर होता है कि पहले छह महीने के लिए सिर्फ मां का दूध पिलाने और छह से ग्‍यारह महीने की अवधि के लिए मां के दूध को जारी रखने से पांच वर्ष से नीचे के शिशुओं की म़ृत्‍यु दर में 13 से 15 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। एक अन्‍य अध्‍ययन के अनुसार सभी नवजात शिशुओं को जन्‍म के पहले दिन से मां का दूध देने से 6 प्रतिशत और जन्‍म के एक घंटे के अन्‍दर मां का दूध दिये जाने से नवजात शिशु म़ृत्‍यु दर में 22 प्रतिशत की कमी की सकती है। मां का दूध कई संक्रमणकारी बीमारियों जिसमें डायरिया और स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी शामिल हैं, से बचाव में मदद के साथ कई स्‍थायी समस्‍याओं जैसे उच्‍च रक्‍तचाप, डायबिटीज, दिल की बीमारियों और कई अन्‍य बीमारियों से बचाव में मदद प्रदान करता है। मां का दूध पीने वाले बच्‍चों में उच्‍च बौद्धिक स्‍तर देखा गया है। यह मां और बच्‍चे के बीच एक भावनात्‍मक बंधन बढ़ाने के साथ उत्‍साह स्‍नेह और प्‍यार बढ़ाता है और इसलिए यह सिर्फ एक भोजन से कहीं अधिक है। मां का दूध साफ, बैक्टीरिया मुक्‍त, संक्रमण रोधी और जब आवश्‍यक हो तब हमेशा तैयार और उचित तापमान में उपलब्‍ध रहता है। इसके अतिरिक्‍त यह किफायती (विशेष तौर पर गरीब लोगों के लिए) और संदूषण से मुक्‍त होता है।

     स्तनपान मां के लिए भी कई स्‍वास्‍थ्‍य लाभ प्रदान करता है। इससे खून की कमी में गिरावट रोकने के साथ-साथ मां को अपना स्‍वाभाविक रूप पुन: प्राप्‍त करने में भी मदद मिलती है। इससे स्‍तन और बच्‍चेदानी के कैंसर से भी सुरक्षा मिलती है। वे माताएं जो अपने शिशुओं को स्तनपान  करातीं हैं वे अपने शिशुओं के साथ व्‍यवहारिक तालमेल और शिशु के पालन पोषण के संबंध में बेहतर नजर आतीं हैं। स्‍तनपान समाज के लिए भी लाभदायक है, क्‍योंकि इससे बच्‍चों की बीमारी में कमी आती है और परिवार पर पड़ने वाले वित्‍तीय दबाव को कम करने में मदद मिलती है। स्तनपान कराने से बच्‍चों के कम बीमार पड़ने के कारण माताएं अपने कार्य को अधिक कुशलता से कर सकतीं हैं अपने नियोक्‍ता के लाभ में वृद्धि करतीं हैं। इसलिए मां के प्‍यार के समान स्तनपान का कोई विकल्‍प नहीं है।       (पत्र सूचना कार्यालय)     07-सितम्बर-2012 19:45 IST

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1 से 7 सितम्‍बर राष्‍ट्रीय पोषक सप्‍ताह के रूप में मनाया जाता है
*  इंस्‍टीट्यूट ऑफ होम इकनॉमिक्‍स में एसोसिएट प्रोफेसर  (पोषण)
*  इंस्‍टीट्यूट ऑफ होम इकनॉमिक्‍स में अनुसंधान शोधार्थी
लेख में व्‍यक्‍त किये गये विचार लेखक के अपने हैं और यह जरूरी नहीं है कि पत्र सूचना कार्यालय इनसे सहमत हो

Friday, September 7, 2012

कन्याओं का पालन-पोषण

6593 बच्चों को दत्तक ग्रहण हेतु परिवारों को दिया गया 
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा तीरथ ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि भारत सरकार द्वारा अधिसूचित बच्चों के दत्तक ग्रहण हेतु अधिशासी दिशानिर्देश, 2011 के अंतर्गत निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2000 की धारा 41 के तहत गैर-रिश्तेदारी व्यक्तियों द्वारा बच्चों को गोद लिया जा सकता है। इन दिशानिर्देशों के प्रावधानों के अनुसार विशेषज्ञों द्वारा कराए गए गृह अध्ययन के आधार पर संभावित माता-पिता के रूप में दत्तक ग्रहण एजेंसियों में पंजीकृत व्यक्तियों के बच्चों की देखरेख करने हेतु उपयुक्त पाए जाने पर ही वे बच्चों को गोद ले सकते हैं। जनवरी, 2011 से मार्च़ 2012 तक 6593 बच्चों को दत्तक ग्रहण हेतु परिवारों को दिया गया है।
मंत्री महोदया ने कहा कि दत्तक ग्रहण करने वाले माता-पिता को सहायता करने के लिए दत्तक ग्रहण एजेंसी की बाल देखरेख निधि के लिए माता-पिता द्वारा अपेक्षित अंशदान में विशिष्ट परिस्थितियों के मद्देनजर छूट देने की उपर्युक्त दिशानिर्देशों में अनुमति दी गई है। इसके अलावा, समेकित बालक संरक्षण स्कीम जिसके अंतर्गत राज्य सरकारों/संघ राज्य प्रशासनों को मंत्रालय द्वारा अन्य बातों के साथ-साथ दत्तक ग्रहण एजेंसियों के प्रबंधन और उनके साथ रखे गए बच्चों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए निधियां प्रदान की जाती है। यदि गोद लेनेवाले भारतीय माता-पिता भुगतान करने में असमर्थ होते हैं तो कानूनी खर्च के भुगतान हेतु भी अनुदान दिए जाते हैं।(PIB) 
  06-सितम्बर-2012 15:51 IST

विधवाओं के लिए योजनाएं

गरीब परिवारों की 40-59 वर्ष की आयु की विधवाओं को पेंशन
                                                                                                                                                                                     साभार चित्र 
ग्रामीण विकास राज्‍य मंत्री श्री प्रदीप जैन 'आदित्‍य' ने आज लोकसभा में एक प्रश्‍न के लिखित उत्‍तर में बताया कि इंदिरा गांधी राष्‍ट्रीय विधवा पेंशन योजना (आईजीएनडब्‍ल्‍यूपीएस) का कार्यान्‍वयन ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में किया जाता है ताकि गरीबी की रेखा से नीचे जीवन बसर करने वाले परिवारों की 40-59 वर्ष की आयु की विधवाओं को पेंशन दी जा सके। मंत्रालय राज्‍य सरकारों के जरिए मजदूरी रोजगार के लिए महात्‍मा गांधी राष्‍ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) तथा देश के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली विधवाओं सहित निर्धन परिवारों के स्‍व-रोजगार के लिए स्‍वर्णजयंती ग्राम स्‍वरोजगार योजना (एसजीएसवाई)/ राष्‍ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम)/ आजीविका नामक प्रमुख योजनाओं को भी क्रियान्वित करता है। चालू वित्‍त वर्ष (अर्थात 2012-13) के दौरान मनरेगा और एसजीएसवाई/एनआरएलएम के अंतर्गत किया गया बजट प्रावधान क्रमश: 33,000 करोड़ रुपये और 3515 करोड़ रुपये है। वित्‍त मंत्रालय द्वारा राज्‍य सरकारों को आईजीएनडब्‍ल्‍यूपीएस के अंतर्गत अतिरिक्‍त केन्‍द्रीय सहायता (एसीए) के रूप में निधियां रिलीज की जाती हैं। (PIB06-सितम्बर-2012 19:10 IST

Thursday, September 6, 2012

मकसद:महिलाओं को सम्‍मान की आजीविका


डॉ. फारूख अब्‍दुल्‍ला ने लॉन्‍च किया पर्यावरण अनुकूल इलेक्‍ट्रिक रिक्‍शा
सामाजिक और आर्थिक हैसियत में गहरे लिंग-भेद को मिटाने की दिशा में पहल करते हुए केन्‍द्रीय नवीन एवं नवीकरण उर्जा मंत्री डॉ. फारूख अब्‍दुल्‍ला ने आर्थिक रूप से पिछड़ी महिलाओं को सशक्‍त करने के लिए आज ‘उम्‍मीद की इलेक्ट्रिक रिक्‍शा’ का वितरण किया। दिल्‍ली के जामिया नगर में आयोजित एक कार्यक्रम में डॉ. फारूख अब्‍दुल्‍ला ने 33 साल की महिला कोहिनूर को पहली इलेक्ट्रिक रिक्‍शा सौंपी। कोहिनूर दो बच्‍चों की अकेली मां है और साथ में उनकी बूढ़ी मां भी रहती हैं।

इस मौके पर डॉ. फारूख अब्‍दुल्‍ला ने कहा कि वे कोहिनूर को उम्‍मीद की पहली रिक्‍शा सौंपकर काफी खुश हैं। देखने में ये रिक्‍शा काफी सुन्‍दर है, इसे चलाना आसान है और इससे कोई प्रदूषण नहीं होता है। उन्‍होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों के बीच इलेक्‍ट्रिक रिक्‍शा एक अच्‍छा विकल्‍प है। साथ ही डॉ. फारूख ने वहाँ मौजूद लोगों से कहा कि घर-घर सोलर वाटर हीटर पहुंचाने में भी उनका मंत्रालय पूरा सहयोग करेगा।

इस पहल में आर्थिक और सामाजिक रूप से दरकिनार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए काम कर रही उम्‍मीद और सेंटर फॉर इक्विटी और एन्‍क्‍लुजन संस्‍था भी भागीदार है। इस पहल का मकसद पर्यावरण अनुकूल इस इलेक्ट्रिक रिक्‍शे से महिलाओं को इज्‍जत की रोटी कमाने का मौका उपलब्‍ध कराना है। उम्‍मीद संस्‍था ने इसके लिए महिलाओं को प्रशिक्षित करने और रिक्‍शे के रख-रखाव का भी वादा किया है। (पीआईबी)
                                              06-सितम्बर-2012 20:44 IST
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Saturday, August 18, 2012

London Olympic Bronze Medal winner

The President felicitates Smt. Mary Kom 
The President, Shri Pranab Mukherjee felicitates Smt. Mary Kom, the London Olympic Bronze Medal winner in Women’s Flyweight Boxing, at a function, in New Delhi on August 18, 2012.
(PIB photo) 18-August-2012

National Mission

launch of the Convergence Projects for Empowering Women
The Minister of State (Independent Charge) for Women and Child Development, Smt. Krishna Tirath alongwith the Union Minister for Rural Development, Shri Jairam Ramesh and the Union Minister for Tribal Affairs and Panchayati Raj, Shri V. Kishore Chandra Deo at the launch of the Convergence Projects of the National Mission for Empowerment of Women (NMEW), under Ministry for Women and Child Development, in New Delhi on August 18, 2012. (PIB photo)          18-August-2012