Monday, December 29, 2014

'वो एक माँ थी"

Posted on Sunday 28 December 2014
दिल को झंकझोर देने वाली हकीकत का खूबसूरत बयान ध्यान से पढ़िए 
कहानी पढ़ते समय दिल के साथ दिमाग को भी काम मेँ लेँ ।
===================
राजेश और उसकी बीवी प्रिया एक मित्र
के यहाँ पर्व मनाकर अपने गाडी से
घर वापस लौट रहे थे।
काफी रात हो चुकी थी ।और
बारिश
की वजह से राजेश बहुत
धीमी गती से
गाड़ी चला रहा था।
तभी अचानक बिजली गीर गई।
बिजली के
रोशनी मे राजैश को गाड़ी के सामने कुछ
दिखाई दिया
तो उसने गाड़ी रोक दी।गाड़ी रुक ने
पर उसकी बीवी ने
कहा क्या हूवा गाड़ी क्यों रोक दी?
राजेश ने आगे कि ओर इशारा किया।
प्रिया ने आगे देखा तो वो डर गयी।
क्यों की
गाड़ी के सामने एक औरत
खड़ी थी।
वो औरत गाड़ी के पास आयी।
और हाथ से गाड़ी का शीशा नीचे
करने
का इशारा करने लगी।
राजेश
की बीवी प्रिया काफी डर
गयी थी।
उसने राजेश को गाडी चलाने को कहा।
लेकिन गाड़ी भी स्टार्ट
नही हुईं।
गाड़ी के बाहर खडी औरत बारिश
की वजह
भीग गयी थी। वो हाथ जोडकर
गाड़ी का शिशा निचे करने
का इशारा कर रही थी।
राजेश को लगा कि वो औरत किसी मुसीबत मे
है। इसलिए उसने गाड़ी का शिशा निचे
किया।
वो औरत हाथ जोडकर बोली
'भाई साहब
मेरी मदत किजीऐ।
तेज बारिश कि वजह से मेरे
गाड़ी का अॅक्सीटेंड हुआ है।
मेरी गाड़ी रस्ते के निचे गीर
गयी है।
उसमें मेरा छोटा बच्चा है।प्लिज
उसे बचाईये।
राजेश गाड़ी से उतरा और उस औरत के
पिछे गया।
उस औरत की गाड़ी रस्ते के
काफी निचे
गिर गयी थी।
अजय निचे उतरकर उस गाडी मे से
रो रहे उसके बच्चे को बाहर निकाला।
फिर राजेश को लगा की ड्रायवर
की सीट पर
भी कोई है।
जब राजेश ने ड्रायव्हर
की सीट पर देखा तो उसके होश उड गये।
क्योंकी ड्रायव्हर के सीट पर
वही औरत खून से लथपत
मरी पडी थी।
राजेश को अब सब समझ मे आया।
वो बच्चे को लेकर अपने गाड़ी के पास
आया।
बच्चे अपने बीवी प्रिया के पास
दिया।
उसकी बीवी बोली 'वो औरत
कहा है?'वह
कौन थीं? '
राजेश बोला
.
.'वो एक माँ थी"
कहानी पढ़ते समय दिल के साथ दिमाग को भी काम
मेँ लेँ ।
===================
आधी रात को बहुत बारिश
हो रही थी।
राजेश और उसकी बिवी प्रिया एक मित्र
के यहाँ पर्व मनाकर अपने गाडी से
घर वापस लौट रहे थे।
काफी रात हो चुकी थी ।और
बारिश
की वजह से राजेश बहुत
धीमी गती से
गाड़ी चला रहा था।
तभी अचानक बिजली गीर गई।
बिजली के
रोशनी मे राजैश को गाड़ी के सामने कुछ
दिखाई दिया
तो उसने गाड़ी रोक दी।गाड़ी रुक ने
पर उसकी बिवी ने
कहा क्या हूवा गाड़ी क्यों रोक दी?
राजेश ने आगे कि ओर इशारा किया।
प्रिया ने आगे देखा तो वो डर गयी।
क्यों की
गाड़ी के सामने एक औरत
खड़ी थी।
वो औरत गाड़ी के पास आयी।
और हाथ से गाड़ी का शीशा नीचे
करने
का इशारा करने लगी।
राजेश
की बीवी प्रिया काफी डर
गयी थी।
उसने राजेश को गाडी चलाने को कहा।
लेकिन गाड़ी भी स्टार्ट
नही हुईं।
गाड़ी के बाहर खडी औरत बारिश
की वजह
भीग गयी थी। वो हाथ जोडकर
गाड़ी का शिशा निचे करने
का इशारा कर रही थी।
राजेश को लगा कि वो औरत किसी मुसीबत मे
है। इसलिए उसने गाड़ी का शिशा निचे
किया।
वो औरत हाथ जोडकर बोली
'भाई साहब
मेरी मदत किजीऐ।
तेज बारिश कि वजह से मेरे
गाड़ी का अॅक्सीटेंड हुआ है।
मेरी गाड़ी रस्ते के निचे गीर
गयी है।
उसमें मेरा छोटा बच्चा है।प्लिज
उसे बचाईये।
राजेश गाड़ी से उतरा और उस औरत के
पिछे गया।
उस औरत की गाड़ी रस्ते के
काफी निचे
गिर गयी थी।
अजय निचे उतरकर उस गाडी मे से
रो रहे उसके बच्चे को बाहर निकाला।
फिर राजेश को लगा की ड्रायवर
की सीट पर
भी कोई है।
जब राजेश ने ड्रायव्हर
की सीट पर देखा तो उसके होश उड गये।
क्योंकी ड्रायव्हर के सीट पर
वही औरत खून से लथपत
मरी पडी थी।
राजेश को अब सब समझ मे आया।
वो बच्चे को लेकर अपने गाड़ी के पास
आया।
बच्चे अपने बीवी प्रिया के पास
दिया।
उसकी बीवी बोली 'वो औरत
कहा है?'वह
कौन थीं? '
राजेश बोला
.
.
.
'वो एक माँ थी।

Tuesday, December 3, 2013

Beautiful Young Chinese Girls Executed


Uploaded on Aug 9, 2011
10 tragic stories of young girls sentenced to death and killed in the past years. Pictures show the last moments of the short lives of the girls.

AND TO ALL OF YOU HATERS WHO ATTACK AND INSULT ME, I FOUND THE ENTIRE CONTENT OF THIS VIDEO ON A CHINESE WEBSITE. I THOUGHT THE STORIES ARE INTERESTING AND SO I MADE THIS VIDEO TO SHARE THOSE STORIES WITH YOU GUYS. OF COURSE I DONT DEFEND CRIMINALS BUT AS I AM A WARM HEARTED HUMAN BEING I STILL FEEL SAD FOR YOUNG PEOPLE BEING CAPITAL PUNISHED REGARDLESS OF WHAT THEY DID. AND
I NEVER EVER MENTIONED ANYTHING LIKE THAT THOSE GIRLS SHOULD BE TREATED DIFFERENTLY THEN UGLY GIRLS/MEN/ETC.

Please keep that in mind before you comment stupid things!
Thanks for watching anyway!

यह बलिदान केवल लड़की ही कर सकती है

इसलिए हमेशा लड़की की झोली वात्सल्य से भरी रखना...

सीमेंट सिटी के नाम से जाना जाता सतना मध्यप्रदेश का एक जाना माना क्षेत्र है। बहुत पहले इसका नाम सुतना हुआ करता था पर फिर वक़त ने कुछ करवट ली तो इसका नाम सतना दरया के नाम पर पढ़ गया सतना। इस इलाके के प्रेमियों ने सतना नाम से एक प्रोफाईल फेसबुक पर भी  है। इस पेज पर एक बहुत अच्छी काव्य रचना पोस्ट की गई है। बेटी के साथ प्रेम और संवेदना के भावों को झंकृत करने के साथ साथ उन्हें मज़बूती भी देती है। आपको यह रचना कैसी लगी अवश्य बताएं।  

एक लड़की ससुराल चली गई,
कल की लड़की आज बहु बन गई.
कल तक मौज करती लड़की,
अब ससुराल की सेवा करना सीख गई.
कल तक तो टीशर्ट और जीन्स पहनती लड़की,
आज साड़ी पहनना सीख गई.
पिहर में जैसे बहती नदी,
आज ससुराल की नीर बन गई.
रोज मजे से पैसे खर्च करती लड़की,
आज साग-सब्जी का भाव करना सीख गई.
कल तक FULL SPEED स्कुटी चलाती लड़की,
आज BIKE के पीछे बैठना सीख गई.
कल तक तो तीन टाईम फुल खाना खाती लड़की,
आज ससुराल में तीन टाईम
का खाना बनाना सीख गई.
हमेशा जिद करती लड़की,
आज पति को पूछना सीख गई.
कल तक तो मम्मी से काम करवाती लड़की,
आज सासुमां के काम करना सीख गई.
कल तक तो भाई-बहन के साथ
झगड़ा करती लड़की,
आज नणंद का मान करना सीख गई.
कल तक तो भाभी के साथ मजाक करती लड़की,
आज जेठानी का आदर करना सीख गई.
पिता की आँख का पानी,
ससुर के ग्लास का पानी बन गई.
फिर लोग कहते हैं कि बेटी ससुराल जाना सीख गई.

(यह बलिदान केवल लड़की ही कर
सकती है,इसिलिए हमेशा लड़की की झोली
वात्सल्य से भरी रखना...)
बात निकली है तो दूर तक जानी चाहिये!!!
शेयर जरुर करें और लड़कियो को सम्मान दे!

Monday, October 7, 2013

टेक्सटाइल मजदरों के संघर्ष में भी आगे है महिला शक्ति

Mon, Oct 7, 2013 at 5:30 PM
श्रम विभाग पर रोषपूर्ण प्रदर्शन:चौथे दिन भी नहीं हुआ कोई फैसला 
लुधियाना:07 अक्टूबर 2013: (*विश्वनाथ//पंजाब स्क्रीन ब्यूरो): नारी शक्ति एक बार फिर संघर्ष की राहों पर पुरुष के साथ कंधे से कंधा मिला कर चला रही है। यह बात आज हड़ताली टेक्सटाइल मजदूरों के रोष प्रदर्शन में देखने को मिली। ये मजदूर श्रम विभाग कार्यालय पर रोषपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे स्थिति करो या मरो जैसी थी। श्रम विभाग ने मजदूरों और मालिकों को आज की तारीख पर श्रम कार्यालय बुलाया था। लेकिन वहाँ न मालिक मिले न श्रम अधिकारी। बहुत से कानूनों का दावा होने के बावजूद मजदूरों को बुलाने और खुद गायब हो जाने का यह निंदनीय सिलसिला बहुत पुराना है।टेक्सटाइल-हौजरी कामगार यूनियन के अध्यक्ष राजविन्दर ने बताया कि मालिकों के साथ साथ श्रम अधिकारियों द्वारा अपनाए जा रहे यह मजदूर विरोधी रवैया मजदूरों को कतई झुका नहीं पाएगा बल्कि इससे मजदूरों में रोष को और भी बढ़ गया है। मजदूर अपने अधिकार हासिल करके ही काम पर लौंटेंगे भले ही उन्हें कितनी भी लम्बी हड़ताल क्यों न लडऩी पड़े। इस दी में लाठी भी चल सकती थी और गोली भी लेकिन महिला शक्ति पुरुष मजदूर साथियों के साथ बराबर डटी रही। 

गौरतलब है कि इस समय 36 कारखानों के मजदूर टेक्सटाइल हौजरी कामगार यूनियन के नेतृत्व में हड़ताल पर हैं। यहाँ 40 कारखानों में पहले ही 15 प्रतिशत वेतन/पीस रेट वृद्धि और 8.33 प्रतिशत सालाना बोनस की माँग पर समझौता हो चुका है। लेकिन 36 कारखानों के मालिक मजदूरों को उनके कानूनी अधिकार देने को तैयार नहीं हैं। अधिकार पाने के रास्ते में आ रही चुनौतियों को स्वीकार करने में इन महिलायों ने एक पल भी नहीं लगाया। इन्हें देख कर प्राचीन मजदूर संघर्षों की याद ताज़ा हो गई।

इन संघर्षशील महिलायों ने एक बार फिर साबित किया कि वे चूल्हे चौंके से लेकर सडक पर उतरे संघर्ष में भी किसी से कम नहीं। श्रम विभाग कार्यालय पर हुए प्रदर्शन में कई अन्य संगठनों के नेताओं ने समर्थन जाहिर किया। प्रर्दशन को टेक्सटाइल हौजरी कामगार यूनियन के अध्यक्ष राजविन्दर, कारखाना मजदूर यूनियन के संयोजक लखविन्दर, मोल्डर एण्ड स्टील वर्कज यूनियन के हरजिन्दर सिंह, इंटक के उपाअध्यक्ष सबरजीत सिंह सरहाली व टेक्सटाइल-हौजरी कामगार यूनियन के समिति सदस्यों विश्वनाथ, प्रेमनाथ, गोपाल आदि ने सम्बोधित किया। सभी मजदूरों ने जोशीले नारों के साथ यह ऐलान किया कि उनकी लड़ाई हक हासिल होने तक जारी रहेगी।

*विश्वनाथ टेक्सटाइल-हौजरी कामगार यूनियन, पंजाब (रजि.) के सचिव हैं   

Saturday, August 31, 2013

'अहिंसा संदेशवाहक' कार्यक्रम का शुभारंभ

31-अगस्त-2013 17:59 IST
शुभारंभ किया यूपीए अध्‍यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी ने
इस अवसर पर श्रीमती कृष्‍णा तीरथ ने कहा कि 'अहिंसा संदेशवाहक' से महिला सशक्तिकरण
यूपीए अध्‍यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी ने आज यहां महिला और बाल विकास मंत्रालय के 'अहिंसा संदेशवाहक' कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर महिला और बाल विकास मंत्री श्रीमती कृष्‍णा तीरथ ने समारोह की अध्‍यक्षता की। पंचायती राज और जनजातीय मामले मंत्री श्री वी. किशोर चंद्र देव और संसद सदस्‍य श्री जे. पी. अग्रवाल भी मौजूद थे। समारोह में दिल्‍ली एनसीआर से करीब 30 हजार बालिकाओं ने हिस्‍सा लिया, जिन्‍हें राजीव गांधी किशोरी अधिकारिता कार्यक्रम या सबला से लाभ प्राप्‍त हुआ है।

इस अवसर पर श्रीमती सोनिया गांधी ने कहा कि 'अहिंसा संदेशवाहक' सीधे रुप से महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के साथ जुड़ा हुआ है। उन्‍होंने कहा कि ये 'अहिंसा संदेशवाहक' महिलाओं के कानूनी अधिकारों और उनके आर्थिक एवं सामाजिक विकास के बारे में जागरूकता और ज्ञान का प्रचार करेंगे। श्रीमती गांधी ने कहा कि समाज में महिलाओं की सुरक्षा और उन्‍हें गरिमा प्रदान करने के लिए लोगों की मानसिकता में परिवर्तन लाना बहुत जरूरी है। उन्‍होंने कहा कि इस कार्यक्रम की विशेषता यह है कि इसमें किशोर बालकों को भी शामिल किया गया है। उन्‍होंने कहा कि सबसे पहले आंगनवाडि़यों ने कुछ महिलाओं को 'अहिंसा संदेशवाहक' का प्रशिक्षण दिया जाएगा। श्रीमती गांधी ने कहा कि पंचायती राज संस्‍थानों में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण लागू करने से लाखों महिलाओं को अपनी बात कहने का हक मिला है। 

श्रीमती गांधी ने यह भी कहा कि सिर्फ नीतियां घोषित करने और कानून लागू करने से महिलाओं का सशक्तिकरण नहीं हो पाएगा। उन्‍होंने इसके लिए कानून और नीतियों को निचले स्‍तर पर कारगर ढंग से लागू करने की आवश्‍यकता पर बल दिया। 

महिला और बाल विकास मंत्री श्रीमती कृष्‍णा तीरथ ने कहा कि महिलाएं समाज के विकास में तभी योगदान कर सकती हैं जब उन्‍हें मानसिक, सामाजिक, शैक्षिक और वित्‍तीय दृष्टि से अधिकारिता प्रदान की जाए। उन्‍होंने बताया कि 'अहिंसा संदेशवाहक' कार्यक्रम की परिकल्‍पना 2009 में की गयी थी। उन्‍होंने बताया कि आज सबला के अंतर्गत एक करोड़ लड़कियों को 'अहिंसा संदेशवाहक' का कार्य संभालने के लिए प्रशिक्षित किया जा चुका है। उन्‍होंने कहा कि इस कार्यक्रम का मुख्‍य उद्देश्‍य महिलाओं और बच्‍चों के खिलाफ होने वाली हिंसा पर काबू पाना है। कार्यक्रम में किशोर और किशोरियों दोनों को ही शामिल किया गया है। 

इस अवसर पर महिला और बाल विकास मंत्रालय की सचिव सुश्री नीता चौधरी और अन्‍य वरि‍ष्ठ अधिकारी भी उपस्‍थित थे। 
 'अहिंसा संदेशवाहक' कार्यक्रम का शुभारंभ 
वि. कासोटिया/देवेश/प्रदीप/बेसरा/चि‍त्रदेव-5968

Friday, August 30, 2013

झांसी किले की 400वीं वर्षगांठ

30-अगस्त-2013 15:47 IST   
 ‘कौमी एकता का प्रतीक:झांसी दुर्ग’ पर संगोष्‍ठी आयोजित
झांसी किले में उसकी 400वीं वर्षगांठ का कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस अवसर इस अवसर पर  केंद्रीय संस्‍कृति मंत्री श्रीमती चंद्रेश कुमारी कटोच मुख्‍य अतिथि थीं। 
झाँसी: 30 अगस्त 2013: (पीआईबी) भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण, लखनऊ सर्किल, लखनऊ ने हाल ही में ऐतिहासिक झांसी किले में उसकी 400वीं वर्षगांठ का कार्यक्रम आयोजित किया। इस अवसर पर ‘कौमी एकता का प्रतीक:झांसी दुर्ग’ पर एक संगोष्‍ठी आयोजित की गई। केंद्रीय संस्‍कृति मंत्री श्रीमती चंद्रेश कुमारी कटोच मुख्‍य अतिथि थीं। इस समारोह में ग्रामीण विकास राज्‍य मंत्री श्री प्रदीप कुमार जैन, भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण के महानिदेशक श्री प्रवीण श्रीवास्‍तव, बुंदेलखंड विश्‍वविद्यालय, झांसी के कुलपति श्री अविनाश चंद्र पांडे भी उपस्थित हुए। इस उपलक्ष्‍य में लखनऊ में विभिन्‍न स्‍थानों पर साल भर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। (PIB)
***
इ.अहमद/प्रियंका/सुमन – 5933


झांसी किले की 400वीं वर्षगांठ 

Saturday, August 17, 2013

महिला सशक्तिकरण, बच्‍चों का पोषण:

16-अगस्त-2013 16:00 IST
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की उपलब्धियां
स्‍वतंत्रता दिवस-2013 के अवसर पर विशेष फीचर-----*श्रीमती कृष्‍णा तीरथ की कलम से 
सुश्री कृष्णा तीर्थ महिला एवं बाल विकास राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार)
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय महिलाओं एवं बच्‍चों से संबंधित सभी मामलों का नोडल मंत्रालय है। मंत्रालय सामाजिक क्षेत्र के मामलों से जुडे अपने दृष्टिकोण में महत्‍वपूर्ण बदलाव की दिशा में बढ रहा है जिसमें पहले कल्‍याण पर ध्‍यान  केंद्रित किया जाता था, लेकिन अब विशेषकर हाशिए पर रहने वालों के संपूर्ण सशक्तिकरण पर ध्‍यान दिया जा रहा है1 मंत्रालय की ओर से महिलाओं, किशोरियों और समाज के सभी वर्गों के बच्‍चों के सशक्तिकरण पर ध्‍यान दिया जाता रहेगा। मंत्रालय ने पिछले चार वर्षों में कई महत्‍वपूर्ण उपलब्धियां प्राप्‍त की हैं।
महत्‍वपूर्ण कानून
मंत्रालय ने कार्यस्‍थल पर महिलाओं के साथ यौन प्रताडना (रोकथाम, प्रतिषेध एवं निवारण) अधिनियम 2013 को मूर्त रूप प्रदान किया है। यह ऐतिहासिक कानून है क्‍योंकि देश में इससे पहले कार्यस्‍थल पर होने वाले यौन उत्‍पीडन से निपटने के लिए कोई ऐसा कानून नहीं था। इस कानून के दायरे में सभी महिलाएं आती हैं चाहे वह किसी भी उम्र की हों और किसी भी निजी या सार्वजनिक कार्यस्‍थल में कार्यरत हों तथा घरेलू सहायक और असंगठित एवं अनौपचारिक सहित किसी भी कार्य में संलग्‍न हों। इस कानून के दायरे में ग्राहक एवं उपभोक्‍ता भी आते हैं। नये कानून के दायरे में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र, संगठित और असंगठित क्षेत्र के विभाग, कार्यालय, शाखा, ईकाई, तथा अस्‍पतालों, नर्सिंग होम्‍स, शैक्षिक संस्‍थाओं, खेल संस्‍थानों, स्‍टेडियम्‍स, खेल परिसरों, सहित ऐसे सभी स्‍थलों को शामिल किया गया है, जहां अपने काम के सिलसिले में कर्मचा‍री को जाना पड़ता है। इसमें परिवहन के साधन भी शामिल हैं। इस कानून को लागू करने के लिए नियमों का निर्धारण किया जा रहा है।

बच्‍चों से दुर्व्‍यवहार की बढती घटनाओं के मद्देनजर मंत्रालय ने एक विशेष  कानून- यौन उत्‍पीडन से बच्‍चों का संरक्षण अधिनियम, 2012 बनाया है। यह कानून 14 नवम्‍बर 2012 से लागू हो गया। यह कानून कडे दंड के माध्‍यम से बच्‍चों को यौन शोषण, यौन उत्‍पीडन और पोर्नोग्राफी सहित कई तरह के अपराधों से संरक्षण मुहैया कराता है। यह कानून विशेष न्‍यायालयों को ऐसे मामलों की त्‍वरित सुनवाई, न्‍यायालयों में बच्‍चों के अनुरूप प्रक्रियाएं और ऐसे मामलों की पुलिस या उचित प्राधिकरण को सूचना न देने तथा उकसाने और झूठी शिकायत झूठी सूचना देने वालों के लिए दंड का अधिदेश देता है।

इसके अलावा, मंत्रालय ने कुष्‍ठ रोग, तपेदिक, हेपेटाइटस-बी आदि जैसी बीमारियों से पीडित बच्‍चों के साथ होने वाले भेदभाव को मिटाने के लिए वर्ष 2011 में किशोर न्‍याय (देखभाल एवं बाल संरक्षण) अधिनियम 2000 का संशोधन किया। इस बारे में 08 सितम्‍बर 2011 को अधिसूचना जारी की गई। महिलाओं का अशोभनीय चित्रण (प्रतिषेध) संशोधन विधेयक 2012 राज्‍य सभा में पेश किया गया है। राज्‍य सभा ने इस विधेयक को विचार के लिए विभाग से संबंधित संसदीय स्‍थाई समिति के पास भेज दिया है। इसके अलावा दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 के लिए कैबिनेट का नोट टिप्‍पणियों के लिए संबंधित मंत्रालयों को भेजा गया है।

महिलाओं के लिए योजनाएं
मंत्रालय ने नवम्‍बर 2010 में राजीव गांधी किशोरी सशक्तिकरण योजना (आरजीएसईएजी)-‘सबला’ योजना शुरू की। योजना का उद्देश्‍य 11 से 18 वर्ष तक की लड़कियों के पोषण तथा स्‍वास्‍थ्‍य में सुधार लाना तथा स्‍वास्‍थ्‍य, शिक्षा, आंगनवाडी केंद्रों में व्‍यवसायिक प्रशिक्षण, परामर्श और मार्गदर्शन उपलब्‍ध कराते हुए शिक्षण और सार्वजनिक सेवाओं तक उनकी पहुंच सुगम बनाकर उन्‍हें आत्‍मनिर्भर बनाना है । ‘सबला’ इस समय देशभर के दो सौ पांच जिलों में चलाई जा रही है। वर्ष 2012-13 के दौरान (31-12-2012 तक) इस योजना से  88.76 लाख किशोरियों को फायदा पहुंचा है।

सरकार ने ‘उज्जवला’ नामक व्‍यापक योजना शुरू की है जो एक ओर तस्‍करी की रोकथाम करती है वहीं दूसरी ओर ऐसी महिलाओं के पुनर्वास और उन्हें समाज से दोबारा जोड़ती है। इस योजना के पांच विशिष्‍ट भाग हैं- इनमें रोकथाम,  पीड़िताओं को शोषण के अड्डों से मुक्त कराना, उनका पुनर्वास, समाज की मुख्‍यधारा से दोबारा जोडना तथा तस्‍करी की शिकार महिलाओं को उनके घर वापस भेजना शामिल हैं। यह योजना मुख्‍य रूप से गैर सरकारी संगठनों की ओर से लागू की जा रही है। वर्ष 2012-13 में इसके लिए 73 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई और 7.39 करोड रूपये जारी किए गए।

     नियमबद्ध नकदी हस्‍तांतरण योजना 'इंदिरा गांधी मातृत्व सहयोग योजना' के तहत वर्ष 2012-13 के दौरान 4.69 लाख गर्भवती महिलाओं तथा बच्चों को दूध पिलाने वाली माताओं को लाभ पहुंचाया गया। यह योजना प्रायोगिक आधार पर 53 चुनिंदा जिलों में आईसीडीएस मंच का इस्‍तेमाल करते हुए लागू की गई थी।  इस योजना के तहत गर्भावस्‍था तथा बच्‍चों को दूध पिलाने की अवस्‍था के दौरान गर्भवती महिलाओं तथा बच्चों को दूध पिलाने वाली माताओं को कुछ विशिष्‍ट शर्ते पूरी करने पर नकदी सहायता मुहैया कराने की परिकल्‍पना की गई है। यह योजना दीर्घकालिक व्‍यवहार एवं सोच में बदलाव लाने के उद्देश्‍य के साथ लघु अवधि आमदनी सहायता उपलब्‍ध कराती है। इस योजना को सरकार की प्रत्‍यक्ष लाभ अंतरण योजना में शामिल किया गया है।

    स्‍वाधार योजना के तहत, मुश्किल हालात में फंसी असहाय  महिलाओं को गृह आधारित संपूर्ण एवं एकीकृत दृष्टिकोण के माध्‍यम से सहायता पहुंचाई जाती है। इस योजना के तहत मुश्किल परिस्थितियों में फंसी महिलाओं का पुनर्वास करने के लिए उन्‍हें आसरा, भोजन,  कपड़े, परामर्श, प्रशिक्षण, चिकित्‍सीय एवं कानूनी सहायता दी जाती है। वर्ष 2009-13 में इस योजना के लिए 2363.15 लाख रूपये जारी किए गए हैं। मंत्रालय ने महिलाओं को प्रशिक्षित करने और उनके कौशल में सुधार लाने के लिए तथा चिह्नित क्षेत्रों में परियोजना के आधार पर रोजगार मुहैया कराने के लिए उन्‍हें प्रशिक्षण एवं रोजगार कार्यक्रम सहायता (एसटीईपी) योजना शुरू की है। वर्ष 2009-13 के दौरान इस योजना से 30,481 महिलाएं लाभान्वित हुई।

     मंत्रालय ने चालू वित्‍त वर्ष के दौरान ‘’वन स्‍टॉप क्राइसिस सेंटर फॉर वुमन’’ (ओएससीसी) नामक नई योजना शुरू करने का प्रस्‍ताव पेश किया है। यह योजना संकट से घिरी महिलाओं को फौरन राहत पहुंचाने के लिए सकारात्‍मक कदम उठाने की जरूरत पूरी करेगी। इस योजना को प्रायोगिक आधार पर शुरूआत में 100 जिलों में लागू करने का प्रस्‍ताव रखा गया है। इसके अलावा महिलाओं से जुड़े कार्यक्रमों और योजनाओं के समन्‍वयन  के लिए प्रायोगिक परियोजनाएं पाली (राजस्‍थान) और कामरूप (असम) में शुरू की गई हैं। महिला संसाधन केंद्र या पूर्ण शक्ति केंद्र (पीएसके) महिलाओं को सेवाएं प्रदान करने वाला वन स्‍टॉप सेंटर है। ऐसे केंद्र 150 ग्राम पंचायतों में खोले गये हैं।  प्रत्‍येक पीएसके में मिशन की ओर से दो महिला ग्राम समन्‍वयक नियुक्‍त किए गए हैं। ये महिला ग्राम समन्‍वयक ग्राम पंचायत में महिलाओं को प्रेरित करते हैं और विभिन्‍न प्रकार के प्रशिक्षण देने के लिए उत्‍तरदायी होते हैं।

 बच्‍चों के लिए योजनाएं
भारत सरकार के प्रमुख कार्यक्रमों में से एक समेकित बाल विकास सेवा (आईसीडीएस) योजना को सशक्‍त बनाया गया है तथा इसका पुनर्गठन किया गया है। यह योजना बच्‍चों की शुरूआती देखभाल और विकास से जुडे दुनिया के सबसे बड़े और अनोखे कार्यक्रम का प्रतिनिधित्‍व करती है। सरकार ने 12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान 1,23,580 करोड़ रूपयों के बजट का आवंटन किया।  पुनर्गठित और सशक्‍त आईसीडीएस तीन चरणों में लागू की जायेगी। इसके पहले साल में (वर्ष 2012-13) में अत्‍यधिक बोझ वाले 200 जिलों को शामिल किया जायेगा। इनमें उत्‍तर प्रदेश के 41 जिले शामिल होंगे। दूसरे साल (वर्ष 2013-14)  में 200 अतिरिक्‍त जिले जोड़े जायेंगे जिनमें विशेष श्रेणी वाले राज्‍यों और पूर्वोत्‍तर क्षेत्र के जिले शामिल होंगे। तीसरे साल (वर्ष 2014-15) के दौरान बचे हुए जिलों को जोडा जायेगा।

     पुनर्गठित आईसीडीएस योजना के अधीन आंगनवाडी अब स्‍वास्‍थ्‍य, पोषण और महिलाओं एवं बच्‍चों के शुरूआती शिक्षण के लिए प्रथम ग्राम आउटपोस्‍ट होगी, 2 लाख आंगनवाडियों को पक्‍की इमारतें मिलेंगी। इन्‍हें बनवाने के लिए इनमें से प्रत्‍येक आंगनवाडी को साढे चार लाख रूपये दिए जायेंगे और 70 हजार आंगनवाडियों या पांच प्रतिशत मौजूदा आंगनवाडियो में ग्रामीण और शहरी क्षेत्र दोनों जगह कामकाजी माताओं के लाभ के लिए क्रेच की सुविधा उपलब्‍ध कराई जायेगी। पूरक आहार के लिए भी अब बच्‍चों के लिए (6-72 महीने) चार रूपये की जगह छह रूपये दिए जायेंगे, बेहद कम वज़न वाले बच्‍चों को 6 रूपये की जगह 9 रूपये तथा गर्भवती और दूध पिलाने वाली माताओं को 5 रूपये की जगह 7 रूपये दिए जायेंगे।

     समेकित बाल संरक्षण योजना (आईसीपीएस) के तहत मंत्रालय मुश्किल परिस्थितियो से घिरे तथा अन्‍य असहाय बच्‍चों को सरकार-सामाजिक संगठनों की भागीदारी के माध्‍यम से सुरक्षित वातावरण उपलब्‍ध कराता है।  इस योजना के तहत बच्‍चों की सुरक्षा के लिए पहले से मौजूद मंत्रालय की योजनाओं को एक व्‍यापक योजना के दायरे में लाया गया है और इसमें बच्‍चों की हिफाजत करने और उन्‍हें नुकसान पहुंचने से बचाने के लिए कई अन्‍य कदम उठाये गए हैं। बाल कल्‍याण समिति (सीडब्‍ल्‍यूसी) और किशारे न्‍याय बोर्ड (जेजेबी) जैसी वैधानिक संस्‍थायें क्रमश: 619 और 608 जिलों में काम कर रही हैं और विविध प्रकार के 1195 गृह वित्‍तीय सहायता उपलब्‍ध करा रहे हैं। आपात स्थिति में बच्‍चों की देखभाल और संरक्षण के लिए ‘चाइल्‍ड लाइन’ सेवा चलाई जा रही है। यह सेवा चौबीस घंटे की फोन हेल्‍पलाइन (1098) के माध्‍यम से चलाई जा रही है। इसका दायरा बढाते हुए इसमें देश के 274 शहरों/जिलों  को शामिल किया गया है। आईसीपीएस के कार्यान्‍वयन से पहले इसके दायरे में 83 शहर आते थे।

     इस कार्यक्रमों और योजनाओं के अलावा महिला एवं बाल विकास मंत्रालय देश के बहुत से हिस्‍सों में घटते बाल लिंगानुपात से निपटने के लिए एक राष्‍ट्रीय कार्य योजना का निरूपण कर रहा है। इसके लिए विभिन्‍न हितधारकों के ज्ञान और विचार शामिल करने के साथ-साथ व्‍यापक विचार-विमर्श किया गया है। बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए राजीव गांधी राष्‍ट्रीय क्रेच योजना का भी पुनर्गठन किया जा रहा है।                  (पीआईबी फीचर)

*महिला एवं बाल विकास राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार)
वि.कासौटिया/इ-अहमद/रीता/चन्‍द्रकला -162